ब्लास्ट के आतंकियों के केस क्यों वापस लेना चाहते थे अखिलेश ? सवाल से बवाल

2007 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की कचहरी में हुआ आतंकी हमले का मामला एक बार फिर से सुर्ख़ियों में है. इसका कारण ये है कि लखनऊ कचहरी ब्लास्ट मामले में दो आतंकियों आजमगढ़ के डॉ तारिक काजमी और कश्मीर के मोहम्मद अख्तर को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है. जिन दो आतंकियों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई गयी है, एक समय इन्ही आतंकियों के मुकदमे उत्तर प्रदेश के उस समय के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव वापस लेना चाहते थे. सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भारतीय जनता पार्टी अखिलेश यादव पर हमलावर हो गई है जिसके  राज्य की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गयी है.

बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा है कि जिन आतंकियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है, उन्हीं आतंकियों के मुकदमे वापस लेकर उन्हें जेल से छुड़ाने की कोशिश अखिलेश यादव ने अपनी सरकार में की थी. अदालत के मना करने के चलते इन आतंकियों के मुकदमे वापस नहीं हो सके और आज अदालत ने इन आतंकियों को दोषी पाते हुए सजा भी सुनाई है. शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि अदालत से आए फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि सपा सरकार में किस तरह ना सिर्फ गुंड़ों, माफियाओं बल्कि आतंकियों तक को भी राजनीतिक संरक्षण हासिल था. तुष्टीकरण की राजनीति के लिए समाजवादी पार्टी ने गुंडों, माफियाओं को तो पाला ही, आतंकियों तक को जेल से छुड़ाने की कोशिश की. ऐसा करके सपा सरकार ने आतंकी ताकतों को मनोबल बढ़ाने और प्रदेश का वातावरण खराब करने का काम किया. बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि सरकार के इस फैसले से वे आम लोग दंग रह गये थे, जिन्होंने वोट देकर प्रदेश की तरक्की के लिए सरकार चुनी थी और पिछले विधानसभा चुनावों में प्रदेश की जनता ने समाजवादी पार्टी को उसकी करनी की सजा भी दे दी.

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जवाब देना चाहिए कि जनता की हिफाजत की शपथ लेने के बाद भी उन्होंने खूंखार आतंकियों की मदद का पाप आखिर क्यों किया? शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि किसे याद नहीं कि 2007 में कचहरी समेत जब पूरे प्रदेश में सीरियल धमाके हुए थे, तब जांच एजेंसियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आतंकियां डॉ तारिक काजमी और मोहम्मद अख्तर को पूरे सबूत के साथ गिरफ्तार किया था. ऐसे में तमाम साक्ष्य और प्रमाण होते हुए भी सपा सरकार में अखिलेश यादव ने इन आतंकियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने का प्रयास किया और उनके निर्देश पर प्रमुख सचिव न्याय ने डीएम को पत्र लिखकर मुकदमा वापस लेने का आदेश दिया था. सरकार के इस कदम से ना सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों के हौसले टूटे थे बल्कि आतंकी ताकतों का मनोबल बढ़ा था और प्रदेश में अमन चैन का वातावरण भी खराब होने के आसार पैदा हुए थे. मामले में अदालत ने अखिलेश सरकार की इस मंशा पर पानी फेरते हुए आतंकियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने से इंकार कर दिया था और अब पुख्ता सबूतों के आधार पर अदालत ने इन्ही आतंकियों को सजा सुनाई है.

Share This Post

Leave a Reply