एक बार फिर से रडार पर आया है देवबंद, वो देवबंद जिसे माना जाता है सुन्नी मुसलमानों का सबसे बड़ा फतवा केंद्र

सुन्नी इस्लामिक शिक्षा का केंन्द्र माना जाने वाला देवबंद अब सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर है. जिस देवबंद के बारे में कहा जाता है कि वहां से ईमान की तालीम दी जाती है उस देवबंद पर सुरक्षा एजेंसियों की टेढ़ी नजर है तथा आशंका जताई जा रही है कि यहाँ देशविरोधी तत्त्व छिपे हो सकते हैं. दिल्ली पुलिस द्वारा जासूसी के संदेह में दिल्ली में पकड़ा गया संदिग्ध बांग्लादेशी उमर फारुक लगभग 11 साल तक देवबंद में रहा. एक मदरसे में पढ़ाई करने के साथ उमर ने यही के पते पर अपना पासपोर्ट बनवा लिया. खुफिया एजेंसियों ने फर्जी दस्तावेज से बनाए गए पासपोर्ट की जांच पड़ताल शुरू कर दी है.

आपको बता दें कि पुलिस ने करीब पंद्रह दिन पहले देवबंद में छिपे बर्मा के एक नागरिक को फर्जी दस्तावेज से पासपोर्ट बनाने के आरोप में दबोचा था. देवबंद में फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. ताजा मामला दिल्ली पुलिस द्वारा जासूसी के संदेह में पकड़े गए बांग्लादेश के मोहम्मद उमर फारुक का है. बताया गया है कि दिल्ली पुलिस ने उसे देवबंद आते समय रास्ते में पकड़ा है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक उमर फारुक वर्ष 2007 से 2012 तक देवबंद में रहा है तथा उमर ने यहां पढ़ाई भी की. उमर फारुख ने वर्ष 2012 में ही देवबंद के पते पर पासपोर्ट बनवा लिया था, जिस पर वह कई देशों की यात्रा कर चुका है.

उमर के बयान के बाद देवबंद में खुफिया एजेंसियों की सरगर्मियां तेज हो गई हैं. एलआईयू से लेकर तमाम दूसरी एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उमर देवबंद के किस मदरसे में पढ़ा, वह किन किन लोगों के संपर्क में था और इतने वर्षों तक वह किन किन ठिकानों पर रहा. इसके साथ ही खुफिया इकाई के अधिकारी कोतवाली का रजिस्टर खंगालने में लगे हुए हैं. खुफिया सूत्रों का कहना है कि दिल्ली पुलिस की पूछताछ रिपोर्ट आने के बाद पूरी स्थिति साफ हो पाएगी. बता दें कि 19 मई को खुफिया इकाई के अधिकारियों ने बर्मा के रहने वाले जुनैद खान नामक युवक को गिरफ्तार किया था. जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनाने की फिराक में था. यही कारन है कि अब सुरक्षा एजेंसियों की देवबंद पर टेढ़ी नजर है तथा देश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है.

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