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बांदा में सिर्फ SDM ही नहीं बल्कि जेलर भी थे साजिश के निशाने पर, एक में मोहरा बना “अफ़सार” तो दूसरे में बहाना था “मुख्तार”. असल में लक्ष्य सिर्फ योगी सरकार

बांदा जिले की इतनी चर्चा कभी वहां के दुर्दांत डाकुओं के लिए की जाती थी , ये पुराने समय की बात है जब ददुआ और ठोकिया जैसे दुर्दान्त्तम डाकुओं ने वहां के जनमानस को हिला कर रखा था . फिर एक एक कर के इन सबका सफाया पुलिस प्रशासन ने अपनी जान पर खेल कर और कुछ ने अपनी जान दे कर किया . फिर काफी समय शांति छाई रही यद्दपि खनन के अपराधी लगातार सक्रिय रहे वहां जो चुपचाप पर्यावरण का संतुलन बिगाड़ते रहे . जमीन बांदा की खोदी जा रही थी और बंगले लखनऊ / कानपुर और दिल्ली जैसे शहरों में खरीदे जा रहे थे , हैरानी की बात ये है कि इस महाअपराध को करने वाले तमाम वो थे जिनकी मातृभूमि थी बांदा की मिटटी . वही मिटटी जिस में वो खेल कर पले बढे थे ये उसको ही खोद रहे थे . ठीक वैसे जैसे एक कुपुत्र खुद को ही पैदा करने वाली माँ को मार डाले, वो भी तडपा तडपा कर और बाद में उनकी लाश बेच दे. 

जिस बाँदा के बगल बहने वाली नदी कि लहरों तक को खामोश करा दिया प्रकृति के गुनाहगारों ने, उसी बांदा में अचानक ही उसमे से कुछ एक साथ शोर मचाना शुरू कर दिए .. ज्यादा चर्चा में थे नरैनी के उपजिलाधिकारी श्री C L सोनकर जी जिनको अफ़सार नाम के एक व्यक्ति के कत्ल का दोषी अचानक ही बना दिया गया जबकि वो इस संसार की हर सम्भव जांच जिसमे नार्को , पोलिग्राफिक , लाइ डिक्टेटर आदि उच्चतम स्तर के टेस्ट शामिल हैं, करवाने को तैयार हैं . फिलहाल मामला अभी जांच के अधीन हैं लेकिन प्रारम्भिक रूप से इतना तो तय लग रहा है कि इसमें कहीं न कहीं अपनी मातृभूमि को ही खोद कर  उसका सौदा कर रहे खनन माफियाओं की संलिप्तता जरूर है जिसे वहां का स्थानीय जनमानस भी दबी जुबान से स्वीकार कर रहा है . 

यहाँ एक तथ्य जो सामने आना बाकी रह गया था वो ये है कि जहाँ एक तरफ SDM सोनकर के खिलाफ इतनी बड़ी साजिश रची गयी जिस से वो अभी तक उबर नहीं पाए हैं वहीँ दूसरी तरफ साजिशकर्ताओं ने निशाना लगा लिया था बांदा जेल के जेलर / अधीक्षक पर भी.. ज़रा सोचिये कई हत्या , अपहरण , गुंडागर्दी और दंगे तक का आरोप झेलने वाले एक विधायक व् यकीनन उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े अपराधी मुख्तार अंसारी के आंतरिक रूप से उठे हार्ट अटैक को कुछ लोगों ने जहर आदि की झूठी कहानी से जोड़ डाला . हद तो तब हुई जब न्यायालय से हट कर अपना खुद का ट्रायल चलाने वाला मीडिया का एक वर्ग भी उन साजिशकर्ताओं की हां में हां मिलाने लगा और अचानक ही मुख़्तार और उनकी पत्नी को चाय में जहर आदि के बेहद भ्रामक खबरें चलाने लगा .

इस मामले को सनसनीखेज रूप देने के लिए इस मामले में वाराणसी के ब्रिजेश सिंह तक के नाम को लिया जाने लगा . यद्दपि अस्पताल में पूरी जांच होने के बाद ये प्रमाणित हो गया कि  चाय , जहर , साजिश जैसी कोई भी बात कहीं से नहीं थी और ये अफवाहें निनांत भ्रामक थी . फिलहाल वर्तमान समय में बाँदा जेल के अधीक्षक के रूप में डॉक्टर S R सिंह जी की तैनाती है जो राजनीति के दबाव से परे अपने कर्म को ही प्रधान रखने के लिए जाने जाते हैं. इस जेल में खनन के भी कई अपराधी बंद हैं जिन्होंने हर सम्भव प्रयास किये लेकिन उनके साथ वही व्यवहार हुआ जो जेल मैनुअल में लिखा हुआ है . 

यदि इस मामले में जल्द ही अस्पताल की रिपोर्ट न आती तो यकीनन आज बांदा जेल के जेलर / अधीक्षक का भी वही हाल किया जा रहा होता जो नरैनी के SDM सोनकर का किया जा रहा है . वो कर्तव्यनिष्ठ जेलर शत प्रतिशत अपने खिलाफ ठीक वैसे ही धरने प्रदर्शन , गिरफ्तारी की मांग झेल रहा होता जो आज SDM सोनकर झेल रहे हैं . मुख़्तार अंसारी के पूरे मेडिकल रिपर्ट में ये साबित हुआ कि उन्होंने वही खाना अदि खाया जो जेल मैनुअल में लिखा था . इस तथ्यात्मक प्रमाण से बांदा जेल के जेलर की कर्तव्यनिष्ठा की गवाही भी मिलती है . लेकिन हार्ट अटैक आते ही जिस प्रकार से जहर जहर का हल्ला मचाया गया वो ठीक उसी प्रकार से था जैसे इन्होने SDM नरैनी सोनकर के खिलाफ शुरुआत में किया था . 

अगर इन घटनाओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाय तो इतना तय माना जाएगा कि बांदा में सिर्फ SDM  सी एल सोनकर या जेलर / अधीक्षक ही निशाने पर नहीं हैं , इसमें यकीनन पूरा तंत्र शामिल है. किस को नहीं पता कि किस पार्टी के मुखिया का ख़ास है माफिया मुख़्तार अंसारी जिसे पार्टी में लेने के लिए पिता पुत्र तक में दरार आ गयी थी और बाद में मुख्तार को बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़ना पड़ा था . ये उसी पार्टी की बात हो रही है जिसका बांदा का जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी SDM सोनकर के खिलाफ होने वाले अलोकतांत्रिक , असंवैधानिक , अवैध और आपराधिक धरने का आयोजन किया था . मुख़्तार अंसारी को जहर देने की अफवाह की जांच चूंकि डॉक्टर को करनी थी इसलिए उसकी रिपोर्ट जल्दी आ गयी लेकिन SDM सोनकर का मामला पुलिस की जांच के अधीन है जिसमे आशा है कि देर सवेर न्याय आ ही जाएगा .  

पहले SDM , फिर जेलर अब सवाल उठता है कि अगला निशाना कौन ? शत प्रतिशत इन सब का अंतिम लक्ष्य है योगीराज को बदनाम करना, वो योगीराज जिसकी पश्चिम उत्तर प्रदेश की पुलिस हर दिन किसी न किसी अपराधी को उसके अंजाम तक पहुचा कर पश्चिम उत्तर प्रदेश को तेजी से निर्भयता की राह ले जा रही है वहीँ पूर्वी उत्तर प्रदेश की पुलिस ऐसा न कर सके यकीनन इसके लिए एक पुरानी कहावत ” offance in the best defence ” को शायद अपराधियों ने सच मान कर वो राह अपना ली है . बांदा के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के सामने बड़ी चुनौती है क्योकि उन्हें न केवल अपने जिले की प्रतिष्ठा अपितु योगीराज पर लग रहे ऐसे गम्भीर आरोपों का असल रूप प्रस्तुत करना होगा .

साथ ही अभी निशाने पर आये तमाम अधिकारियो को भी सतर्क रहना होगा क्योंकि SDM और जेलर के बाद कहीं वो ही अपनी मातृभूमि बेच रहे संवेदनहीन , भावनाशून्य अपराधियों के निशाने पर न हों . और ये सच है कि “अपराधी  किसी का सगा नहीं होता” ख़ास कर वो जो अपनी ही उस मातृभूमि खोद कर बेच रहा हो जहाँ से वो पैदा हुआ और जहाँ अंत में उसको दफन भी होना है . सवाल ये भी है कि क्या योगी आदित्यनाथ द्वारा शासित सत्ता पर पहले दिन से ही कभी सहारनपुर भीम आर्मी के रूप में तो कभी गोरखपुर BRD कालेज के नाम पर हर प्रकार से रूप रख कर आरोप लगा रहे वो तमाम साजिशकर्ता अपने मंसूबों में सफल हो जायेंगे ? 

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