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दारुल उलूम से जुड़े 3 हजार मदरसे जो अखिलेश के दोनों हाथों से पाते थे मदद, नहीं लेंगे योगी से अनुदान…पता है क्यों?

जब से उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार आयी है तथा योगी आदित्यनाथ जी मुख्यमंत्री बने हैं, उत्तर प्रदेश की राजनीति का स्वरूप ही बदल गया है. सिर्फ राजनीति ही नहीं बल्कि सामाजिक स्वरूप भी बदल गया है. सत्ता सँभालते ही योगी आदित्यनाथ जी ने एक के बाद ऐसे फैसले लिए लिए जिससे जनता खुश हुई वहीं अराजक तत्वों में खलबली मच गयी. इससे क्रम में योगी आदित्यनाथ जी ने मदरसों पर काफी सख्ती दिखाई है तथा उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है. योगी के इस फैसले से मदरसा संचालक सकते में आ गये तथा अब दारुल-उलूम-देबबंद ने मदरसों को लेकर एक नया निर्णय लिया है.

दरअसल मदरसों के कामकाज में राज्य सरकारों के दखल से बचने के लिए दारुल उलूम देवबंद ने 3,000 से ज्यादा मदरसों से कहा है कि वे सरकारी सहायता लेना बंद कर दें. ये मदरसे दारुल उलूम देवबंद से संम्बद्ध हैं. वैसे तो ये मदरसे देश के कई हिस्सों में हैं, लेकिन इनकी ज्यादा संख्या यूपी में ही है. जिस तरह से योगी सरकार ने मदरसों पर काफी सख्ती की है उससे बचने के लिए देवबंद ऐसा रास्ता निकाल रहा है. ये योगीराज का ही करिश्मा है कि जो कभी अनुदान पाने के लिए हंगामा करते थे वो हम अनुदान न लेने की बात कर रहे हैं.

ज्ञात हो कि जो मदरसे सरकारी सहायता लेते हैं उन्हें स्कूलों के लिए बने राज्य सरकार के निर्देश का पालन करना पड़ता है. यूपी में योगी के सीएम बनने के बाद से ही मदरसे बीजेपी सरकार के निशाने पर हैं. यूपी के मदरसों के लिए पिछले साल एक पोर्टल बनाकर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने और स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण और राष्ट्रगान की वीडियोग्राफी करने के फरमान के बाद नए साल में योगी सरकार ने उनकी विशेष धार्मिक छुट्टियों पर कैंची चला दी.
यही नहीं, रक्षाबंधन, महानवमी, दशहरा और दिवाली जैसे पर्वों पर मदरसों में अवकाश घोषित कर दिया. पिछले साल जुलाई में योगी सरकार ने एक पोर्टल बनाया, जिस पर सभी मदरसों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया था. इस पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं करने वाले मदरसे सरकारी अनुदान से वंचित हो जाएंगे.
शायद देवबंद मदरसों को योगी सरकार की नजरों से बचाना चाहता है इसलिए अनुदान न लेने की बात कर रहा है. लेकिन यहाँ पर सवाल खड़ा होता है कि आखिर देवबंद व मदरसा संचालक आखिर क्यों सरकारी अनुदान त्यागने को तैयार हैं? उन्हें किस बात का डर है जो वे सरकार की नजरों से बचना चाहते हैं? वैसे सरकार को इस बात की गहनता से जाँच करनी चाहिए कि आखिर इस सबके पीछे देवबंद का क्या मकसद है कि एक समय ये लोग सरकारी अनुदान बढाए जाने के लिए लड़ जाते थे लेकिन अब अनुदान त्याग रहे हैं? वैसे इस आधार पर भी कहा जा सकता है कि योगीराज में यूपी बदल रहा है और शायद इसी बदलाव के लिए ही यूपी की सत्ता योगी को सौंपी गयी थी.

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