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उन्हें भगवान श्रीराम ही नहीं, उनके भाई प्रभु लक्ष्मण जी से भी दुश्मनी है.. इसका गवाह बन रहा उत्तर प्रदेश

अगर आप ये मानते हैं कि उन्हें सिर्फ अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर से ही समस्या है तो शायद आप बहुत बड़े नादान हैं. उनके द्वारा अयोध्या में श्रीराम मंदिर का विरोध उनका एक संकेत मात्र है अपनी धमक जमाने का जिसका उन्होंने उदाहरण भी दिया है कभी लक्ष्मणपुरी के नाम से विख्यात रही उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रभु श्रीराम के भाई श्री लक्ष्मण जी की मूर्ति का विरोध करके. लखनऊ में श्री लक्ष्मण जी की मूर्ति का विरोध ये दिखाता है कि उनकी दुश्मनी सिर्फ श्रीराम से ही नहीं है बल्कि उनके भाई श्री लक्ष्मण जी से भी है. कल उन्होंने श्रीराम का विरोध किया था, आज वह श्री लक्ष्मण जी का विरोध कर रहे हैं तो ये समझ लो कि कल वह निश्चित रूप से जगत जननी माँ सीता, दुर्गा, योगेश्वर श्रीकृष्ण आदि का भी विरोध करेंगे.

आपको बता दें कि लखनऊ नगर निगम लखनऊ में टीले वाली मस्जिद के पास नगर निगम की जमीन पर श्री लक्ष्मण जी की मूर्ति लगाने जा रहा है, इसका प्रस्ताव भी नफर निगम में पेश कर दिया गया है. लेकिन लखनऊ में श्री लक्ष्मण जी की मूर्ति के विरोध में तमाम इस्लामिक मौलाना खड़े हो गए हैं. बता दें कि बीजेपी के दो पार्षदों रजनीश गुप्ता और रामकृष्ण यादव ने टीले वाली मस्जिद के पास नगर निगम की जमीन पर लक्ष्मण की बड़ी प्रतिमा लगाए जाने का प्रस्ताव रखा तो बीजेपी की मेयर संयुक्ता भाटिया ने इसे खुला समर्थन दे दिया. लेकिन इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने इस मामले को गरमाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इस कड़ी में सबसे पहले टीले वाली मस्जिद के इमाम ने इसका विरोध किया फिर शिया और सुन्नी मौलाना ने यह कह कर विरोध किया कि यहां पर लक्ष्मण की प्रतिमा लगाए जाने से तनाव और विवाद होगा. आश्चर्य की बात है कि अगर नगर निगम अपनी जमीन पर श्री लक्षमण जी की मूर्ति लगवा रहा है तब आखिर क्यों साम्प्रदायिक तनाव होगा और ये तनाव कौन उत्पन्न करेगा?

गौरतलब है कि लखनऊ को लक्ष्मण की नगरी के तौर पर जाना जाता रहा है, पौराणिक ग्रंथ में इसे लक्ष्मण की नगरी कहते हैं. नगर निगम लक्ष्मण की प्रतिमा को टीले वाले मस्जिद के इलाके से थोड़ी दूर नगर निगम के बने पार्क या फिर चौराहे पर स्थापित करना चाहता है. बीजेपी प्रवक्ता मनीष शुक्ला के मुताबिक लखनऊ को लक्ष्मण की नगरी कहा जाता रहा है. वे कहते हैं कि आस्था के तौर पर भी लोग इसे लक्ष्मण की नगरी कहते हैं. ऐसे में अगर यहां नगर निगम की किसी जमीन पर लक्ष्मण की प्रतिमा लगाने का प्रस्ताव किया गया है तो इसमें कोई गलत बात नहीं है. वहीं बीजेपी की मेयर संयुक्ता भाटिया हर हाल में लक्ष्मण की मूर्ति लगाने पर आमादा है वह कहती हैं कि हालांकि अभी प्रस्ताव पर आखिरी फैसला नहीं हुआ है लेकिन हम मूर्ति जरूर लगाएंगे. लेकिन मुस्लिम इमाम तथा मौलाना इसके विरोध में खड़े हो गए हैं तथा एलान कर दिया है कि वह किसी भी हालत में लक्ष्मण जी की मूर्ति नहीं लगने देंगे.

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