UP के बांदा जिले के SDM सोनकर पर मुकदमा दर्ज होने के बाद खनन माफियाओं में जश्न का माहौल


उसको अपने इलाके में प्रशासनिक स्तम्भ माना जाता था . सरकार किसी की भी रही हो पर उसने ठान ली थी अपनी क्षमता और अपने स्तर पर किसी भी अवैध कार्य को न होने देने की . उसने किसी दबाव में झुकने से भी मना कर दिया जब बात सत्य और न्याय की थी.. फिर अचानक ही उस पर एक मुकदमा दर्ज हो जाता है वो भी सीधे सीधे कत्ल का , कत्ल उसका जिस से उसकी न कोई पुरानी दुश्मनी थी और ना ही किसी प्रकार की पहले की जान पहिचान . फिर अचानक ही शोर मचना शुरू हो जाता है , कुछ सफेद कुर्ते वाले सडकों पर दिखने शुरू हो जाते हैं और अचानक ही जांच में राजनीति अपनी जगह बना लेती है 

यहाँ बात हो रही है अपनी कडक छवि के लिए प्रशासनिक हलको में जाने जाने वाले उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में स्थित नरैनी क्षेत्र के उपजिलाधिकारी श्री सी एल सोनकर जी की. इस आरोप से पूर्व लगभग निष्कलंक प्रशासनिक जीवन बिताने वाले उपजिलाधिकारी महोदय को अचानक ही घेर लिया गया है अफसार नाम के एक ऐसे व्यक्ति के कत्ल के मामले में जिसे मीडिया का एक वर्ग भले ही बालू व्यापारी बता कर मामला एकपक्षीय बना रहा है लेकिन उसकी अवैध खनन मामले में भूमिका सदा से संदिग्ध रही है . 

अपनी नरैनी पोस्टिंग के समय ही श्री सोनकर महोदय को खनन माफियाओं की तरफ से भारी दबाव था . बांदा एक ऐसा जिला रहा है जो कुछ वर्षों पहले डाकुओं से बुरी तरह से प्रभावित रहा है, स्थानीय प्रशासन और शासन ने दिन रात एक कर के अपना खून और पसीना बहा कर और कुछ ने अपना बलिदान दे कर एक एक कर के डाकुओं से उस क्षेत्र की जनता को मुक्ति दिलाई लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि अवैध खनन का कारोबार फिर भी चलता रहा और इसके चलते अक्सर ईमानदार अधिकारियों को किसी न किसी रूप में तंग किया जाता रहा, उस भारी दबाव और तनाव से SDM सोनकर जी भी अछूते नहीं रहे . 

सत्ता का परिवर्तन हुआ और योगी सरकार आने के बाद यदि किसी विभाग के लिए सबसे ज्यादा दबाव बनाया गया था तो वो है खनन विभाग . खनन का सम्बन्ध पर्यावरण से है इसलिए इसमें सिर्फ पुलिस की ही नहीं बल्कि जिला प्रशासन को भी जिम्मेदार माना जाता है . SDM सोनकर ने अपनी इस जिम्मेदारी को पूरी तन्मयता से पूरा करने की कोशिश जो यकीनन खनन माफियाओं को रास नहीं आ रही थी . शुरू में हर प्रकार से तोड़ने की कोशिश की जाने लगी वरिष्ठ अधिकारियो से ले कर जमीनी स्तर के अधिकारियो को लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली क्योकि योगीराज का सख्त आदेश था ज़रा सा भी ढिलाई न बरतने का . इस मामले में पुलिस प्रशासन का भी कार्य सराहनीय रहा जिन्होंने जिले के वरिष्ठ अधिकारियों संग कंधे से कंधा मिला कर खनन के काले साम्राज्य पर जबर्दस्त वार किया था . 

फिर अचानक ही एक अनहोनी घट जाती है . एक अफसार नाम के व्यक्ति की लाश मिलती है जिसमें अचानक ही परिवार उपजिलाधिकारी और उनके सुरक्षाकर्मियों को ही दोषी बनाने और बताने लगता है . यद्दपि इस मामले की पूरी निष्पक्षता से जांच कर रहे पुलिस अधिकारी अभी तक किसी ऐसे ठोस प्रमाण का दावा नहीं कर रहे जो उपजिलाधिकारी को दोषी साबित करने के लिए सटीक माना जा सके लेकिन इस मामले में नेतागीरी करने वाले तथाकथित नेताओं ने SDM सोनकर का नाम ले कर ऐसे हो हल्ला मचाया जैसे उनके पास पुलिस से भी ज्यादा प्रमाणिक जांच रिपोर्ट है .

ख़ास बात ये रही कि सूत्रों के मुताबिक SDM सोनकर पर मुकदमा दर्ज होने के बाद क्षेत्र तो दूर प्रदेश के कई हिस्सों में खनन माफियाओं में एक प्रकार का उत्साह देखने को मिला है . सुदर्शन न्यूज़ के सहारनपुर के संवाददाता के अनुसार इस मामले के बाद वहां का दुर्दांत खनन माफिया हाजी इकबाल जो बांदा तक पहुच रखता है के गुर्गों को इस मामले पर बात करते सूना गया है . हाजी इकबाल वही खनन माफिया है जो प्रकृति का संतुलन अपने अंधाधुंध खनन से बिगाड़ चुका है और योगी सरकार में अनेक जांच के दायरे में चल रहा है . इतना ही नहीं इसी खनन माफिया ने सुदर्शन संवाददाता राकेश पंडित पर जानलेवा हमला किया जिसमे सुदर्शन न्यूज़ संवाददाता बाल बाल बचे थे . खनन माफियाओं का दुस्साहस और साजिश का स्तर किस हद तक जा सकता है इसका अंदाज़ा ऐसी घटनाओं से लगाया जा सकता है . अब सवाल ये है कि क्या SDM सोनकर आने वाले समय में खनन माफियाओं के पास गिनाने लायक एक नजीर बन जायेगे जिस से वो कभी भी किसी अधिकारी को दबाव में ले लेंगे ? या प्रशासन निष्पक्षता से इस मामले की तह तक जा कर असली दोषियों को बेनकाब कर के शुद्ध और शाश्वत न्याय करेगा …पडोसी जिले हमीरपुर में अवैध खनन के खिलाफ लम्बे समय से जान पर खेल कर संघर्ष कर रहे RTI कार्यकर्ता श्री विजय दिवेदी जी का कहना है कि तमाम खनन माफियाओं के साथ साथ हाजी इकबाल तक की संलिप्तता बुन्देलखण्ड के अवैध खनन अपराध में है .  

इस मामले में SDM श्री सोनकर से बात करने पर उन्होंने स्वय को इस आरोप से बेहद आहत बताया और इसे सीधे सीधे अपने खिलाफ एक बड़ी साजिश करार देते हुए स्वय को शत प्रतिशत निर्दोष बताया . उन्होंने कहा कि मृतक के घर वालों के इस बेहद विषम हालात में उनकी संवेदनाये उस शोक संतृप्त परिवार के साथ हैं लेकिन उनके परिवार द्वारा लगाये जा रहे ऐसे आरोपों से आहत और हतप्रभ हैं . उन्होंने संसार की हर जांच जिसमे लाइ डिक्टेटर , पोलिग्रफिक , नार्को टेस्ट आदि भी शामिल हैं बिना शर्त , बिना विलम्ब करवा कर खुद की बेगुनाही साबित करने की हामी भरी है . कुछ सूत्रों का ये भी कहना है कि यदि पहले दिन जाम अदि लगा कर गैर कानूनी रूप से विरोध प्रदर्शन कर रहे एक एक व्यक्ति की वीडियो रिकार्डिंग ठीक से करवाई गयी होती तो उसमे कुछ ऐसे भी निकलते जो वहां के खनन मामले में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कभी न कभी शामिल पाए गये हैं . इस से एक और बड़ी साजिश की तरफ इशारा होता है जो प्रशासन के जांच का मुख्य बिंदु हो सकता है . 

इस मामले में नरैनी कोतवाली प्रभारी से बात करने पर उन्होंने बताया कि सारा मामला जांच के अधीन है और जांच सही दिशा में संतोषजनक प्रगति के साथ चल रही है इसलिए फिलहाल बिना किसी निष्कर्ष पर पहुचे इस मामले में किसी भी प्रकार का बयान नहीं दिया जा सकता है .  इस मामले में मृतक के परिजनों का पुलिस और प्रशासन से अधिक हंगामा मचाते नेताओं पर ज्यादा विश्वास किया जाना हैरानी भरा है जबकि उन्हें प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी विश्वास दिलाते रहे न्याय की लेकिन फिर भी उन्होंने जनता की परेशानी का कारण बने राजनैतिक नेताओं द्वारा लगाए गये एक बड़े जाम का हिस्सा बने रहे. जबकि उपजिलाधिकारी हर प्रकार से शांत चित्त भाव से हर आदेश का पालन करते रहे और पुलिस व् प्रशासन का हर प्रकार से सहयोग करते रहे. 

मामला गौर करने योग्य ये भी है कि उपजिलाधिकारी ने पल भर के लिए भी खुद को जांच से दूर भगाने का प्रयास नहीं किया और प्रशासनिक अधिकारीयों के सम्पर्क में बने रहे लेकिन ठीक उसी समय मृतक के परिजन नेताओं के साथ नारेबाजी आदि में दिखते रहे ? इन मामलों से सवाल उठता है कि क्या पहले ही दिन से मृतक के परिजनों को क़ानून से अधिक नेताओं पर विश्वास था ? या वो इस मुद्दे पर जांच अधिकारी पर दबाव बनाना चाहते हैं जैसा कि एक बड़ा जाम अदि लगाने का प्रयास किया गया जबकि ये विरोध प्रदर्शन आदि आमतौर पर उस समय किये जाते हैं जब लम्बे समय तक कोई कार्यवाही न की गयी हो पर पहले ही दिन इतनी भीड़ के साथ शासन पर पूर्वाग्रह के साथ टूट पड़ना कही न कहीं कुछ और ही इशारा करता है .. उनसे सवाल भी बनता है कि वो कौन सा न्याय है जो DM , SP आदि के पास न जा कर राजनेताओं के पास जाने से मिल जाता है ?

मृतक का उपजिलाधिकारी से पहले का दूर दूर तक कोई विवाद तो दूर जान पहिचान तक नहीं थी फिर कोई उच्चपदस्थ अधिकारी किसी का कत्ल बिना वजह क्यों करेगा ?

अगर बात बालू आदि निकालने की भी की जाय तो इस से पहले भी इन SDM महोदय ने कई वाहनों को अवैध खनन आदि के मामले में जब्त कर के चालान करवाया है लेकिन कहीं भी मार पीट और गाली गलौज आदि भी सामने नहीं आया तो अचानक ही वही अधिकारी किसी के कत्ल पर उतारू हो जाएगा ये प्रथम दृष्टया समझ के बाहर की बात है.

सवाल ये भी बनता है कि बालू के वैध कारोबारी या अवैध खनन माफियाओं के लेन देन , वाद विवाद आदि एक ही नहीं कई लोगों से होते हैं फिर अचानक ही हल्ला बोल SDM पर ही क्यों ?  

मृतक अफसार को बालू कारोबारी बताने वालों ने शायद ही अब तक उनका व्यपार कर रजिस्ट्रेशन , पुराने व्यापरिक लेखा जोखा, उसकी कम्पनी / फर्म  रजिस्ट्रेशन आदि की डीटेल सार्वजनिक की हो जिस से उसकी कम्पनी से जुड़े अन्य पार्टनर, शेयर होल्डर आदि से पूछताछ पुलिस कर सके और जांच के हर बिन्दुओं पर ध्यान दे सके . 

यदि किसी को इतना विश्वास ही था कि SDM ने ही ये अपराध किया है तो उसने घायल अफसार को चिकित्सीय सुविधा क्यों नहीं पहुचाई या उसके घायल अवस्था में ही पुलिस अदि को फोन कर के क्यों नहीं बुलाया ?

इसके अलावा ऐसे कई सवाल हैं जिसके उत्तर पुलिस को तलाशने ही होंगे . यद्दपि यदि इस मामले में SDM निर्दोष साबित होते हैं तो ये अपराध और अवैध कारोबार से लड़ रहे अधिकारियो की वो पीड़ा को सामने रखेगा जो कहीं न कहीं आगे चल कर उनके लिए डर का कारण बनेगी और हर कार्यवाही से पहले अधिकारी खुद में SDM सोनकर ही देखगा ? शासन के लिए चुनौती खुद को न्यायाधिकरण बना कर जबरन पेश कर रही समाजवादी पार्टी से भी है जो कभी कन्नौज सौरिख थाने के सब इंस्पेक्टर, कभी कानपुर सजेती थाने के इंचार्ज , कभी बिजनौर GRP जवान कमल शुक्ला जैसे निनांत आधारहीन आरोपों से वर्दी वालों और अधिकारियो के मनोबल पर वार करती आई है और अपनी भिडंत भारतीय जनता पार्टी के बजाय उसके शासन में कार्य कर रहे प्रशासनिक अधिकारीयों से कर रही है जिसे यकीनन राजनीति का एक विकृत रूप ही माना जाएगा . फिलहाल सारा मामला जांच के अधीन है जिसमे एक पक्ष शांति से शासन और कानून पर विश्वास कर के न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है जबकि दूसरा पक्ष न जाने कहाँ कहाँ न्याय तलाश रहा है .. साथ ही इस मामले में दोनों ही पक्षों को खुद के साथ न्याय होने की आशा है . 


 


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