रंग लाया मुस्लिम महिलाओं का संघर्ष, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तमाम मुद्दों पर हुआ सहमत

लखनऊ : लखनऊ में दो दिन से चल रही ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बैठक आज रविवार को खत्म हो गई। लागातार ट्रिपल तालक को लेकर आ रही खबरों और इसे खत्म करने की मांग के बीच ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि जो भी इसका दुरुपयोग करेगा उसका बायकॉट किया जाएगा। तीन तलाक के मामले पर स्पष्ट किया कि वो इस मसले को शरीयत के रोशनी में ही देखेंगे और सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अपनी राय रखेंगे।

बोर्ड ने रविवार को कहा कि शरिया कारणों के बिना तीन तलाक देने वालों का सामाजिक बहिष्‍कार किया जाएगा। बता दें कि चार दिन पहले बोर्ड ने कहा था कि अगले डेढ़ साल में तीन तलाक को खत्‍म कर दिया जाएगा, इस मामले में सरकार को दखल देने की जरुरत नहीं है। बोर्ड ने दावा किया था कि देशभर की साढ़े तीन करोड़ मुस्लिम महिलाओं ने शरीयत और तीन तलाक का समर्थन किया है।

वहीं, बोर्ड ने बाबरी मस्जिद मुद्दे पर उच्‍चतम न्‍यायालय के फैसले को मानने की बात भी कही है। शिया समुदाय ने आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की बैठक से पहले अपील की थी कि बोर्ड तीन तलाक की व्यवस्था पर कुरान और शरीयत की रोशनी में इंसानियत के तकाजे को देखते हुए विचार करे। इसके साथ ही बोर्ड ने कहा कि तीन तलाक के कानून में बदलाव के बजाए इसका दुरुपयोग करने वाले व्यक्तियों के आचरण में सुधार की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि उन्हें अपने मुल्क में मुस्लिम पर्सनल लॉ पर अमल करने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। मुस्लिम बोर्ड का मानना है कि सोशल मीडिया का ज्‍यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर इस्लाम और शरीयत के खिलाफ बनाया गया भ्रम दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमने देश में सबसे बड़ा सिग्नेचर कैम्पेन लॉन्च किया है और जो आंकड़े आए हैं, उसमें 5 करोड़ से ज्यादा मुस्लिम महिलाओं ने शरीयत के साथ रहने पर अपनी सहमति दी है।

गौरतलब है कि 30 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए तीन तलाक और तलाक के बाद मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के मामले सुनने के लिए पांच जजों की एक संवैधानिक पीठ का गठन किया था। जिसके बाद मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने इस सुनवाई का विरोध किया था। बोर्ड ने कहा था कि कोर्ट धर्म से जुडे मसलों को संविधान की कसौटी पर नहीं कस सकता। मौलिक अधिकार व्यक्ति के खिलाफ लागू नहीं किये जा सकते।

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