इस्लामिक शिक्षा के केंद्र के शहर देवबंद की तरफ घूम चुकी हैं तमाम खुफियां एजेंसिया… सतर्क रहें आप भी


क्या देवबंद इस्लामिक आतंकियों की पनाह स्थली बनता जा रहा है? क्या देवबंद उन आक्रान्ताओं को शरण दे रहा है जो देश को तबाह करना चाहते हैं? देवबंद शहर जो इस्लामिक शिक्षा का केंद्र माना जा रहा है, आजकल खुफिया एजेंसियों की रडार पर है. देश की ख़ुफ़िया एजेंसियों को आशंका है कि देवबंद में इस्लामिक आतंकी छिपे हो सकते हैं.  हाल ही में देवबंद से जुनैद नामक रोहिंग्या की गिरफ्तारी के बाद खुफिया एजेंसियों के अधिकारी सतर्क हो गए हैं तथा उन्होंने अब गुपचुप तरीके से जांच शुरू कर दी है.

गौरतलब है कि पिछले दिनों बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल्ला की गिरफ्तारी के बाद देवबंद में फर्जी पासपोर्ट के गोरखधंधे का खुलासा हुआ तो हड़कंप मच गया था. जिसके बाद एटीएस, एसटीएफ समेत कई जांच एजेंसियों ने संयुक्त छापेमारी कर नगर क्षेत्र से कई लोगों को गिरफ्तार किया था, लेकिन कई लोग अभी भी एजेंसियों की नजरों से बचे हुए हैं जो बहुत पुराने समय से पासपोर्ट बनवाने का काम कर रहे हैं. पुलिस को आशंका है कि इनमें कुछ लोग स्थानीय भी हैं. इनकी मदद के बिना नगर में कोई भी एजेंट पासपोर्ट नहीं बनवा सकता. शनिवार को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट बनवाने के प्रयास में लगा म्यांमार का रोहिंग्या जुनैद आखिर किसके संपर्क में था और पासपोर्ट बनवाने में कौन-कौन उसकी मदद कर रहे थे, पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है.

पुलिस एवं खुफिया विभाग को आशंका है कि नगर क्षेत्र में और भी संदिग्ध छिपे हो सकते हैं. खुफिया एजेंसियों के अधिकारी भी इस तरफ इशारा तो कर रहे हैं, लेकिन पुख्ता जानकारी न होने के चलते कार्रवाई नहीं कर पा रही हैं. फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने का देवबंद में लगातार खुलासा हो रहा है. दस माह में सात संदिग्ध लोग पकड़े जा चुके हैं. जिनमें पांच लोग बांग्लादेशी आतंकवादी संगठन से जुड़े हुए थे. देवबंद में रहने वालों पर खुफिया विभाग एवं एटीएस की नजर लगी हुई है. सवाल ये भी उठ रहे हैं कि जो देवबंद शहर इस्लामिक शिक्षा का हब है, आखिर वहां इस्लामिक आतंकी शरण क्यों ले रहे हैं? आखिर इसके पीछे का क्या राज है? यही कारण है कि पूरा देवबंद ख़ुफ़िया एजेंसियों की रडार पर है.


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share
Loading...

Loading...