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अधिकारियों पर अनावश्यक दबाव / आरोपों के दुष्प्रभाव दिखने शुरू..बांदा में ADO पंचायत ने फाँसी लगाई , सुसाइड नोट में बता गए सारा दर्द

जिस कुत्सित मानसिकता को ले कर सजिशकर्ताओ ने सीधे प्रशासन पर हल्ला बोला था अचानक ही उसमे उन्हें अपने खतरनाक मंसूबों में सफलता मिलती दिखनी शुरू हो गयी है लेकिन अफसोस की बात ये रही कि इस से न केवल एक सरकारी अधिकारी विदा हो गया अपितु तमाम अन्य के मनोबल की जड़ें भी हिल गयी हैं..इस से बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि अब अधिकारियों / कर्मचारियों को अपनी जान तक देनी पड़ रही है ..

साजिशकर्ताओ की बड़ी बड़ी साजिशों के गवाह बन रहे बांदा ने एक बेहद सनसनीखेज घटनाक्रम में बांदा के कमासिन ब्लॉक में एडीओ पंचायत ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली ..इन पर भारी तनाव व व्यापक दबाव बताया जा रहा है ..हालात ये रहे कि उन्हें किसी मामले में तंग करने वालों ने साजिश का ऐसा ताना बाना बुना कि वो मृत्युपूर्व किसी को अपनी दशा बता कर मदद भी नहीं मांग सके और DM , SDM , SP , DIG आदि बड़े अधिकारियों से भरे बांदा में उन्हें सिर्फ मृत्यु ही अंतिम विकल्प दिखा …

इस घटना के बाद मौके पर जिलाधिकारी श्री महेंद्र बहादुर सिंह व पुलिस अधीक्षक शालिनी जी पहुँची। यह घटना बांदा जिले के थाना कमासिन अन्तर्गत ब्लॉक परिसर की है जहां 59 वर्षीय एडीओ पंचायत लालमणि यादव का सरकारी आवास है जबकि एस डी ओ साहब इलाहाबाद के करछना क्षेत्र के मूल निवासी थे …सरकारी आवास पर वो अकेले ही रहते थे ।

ADO पंचायत श्री लालमणि जी शनिवार को होने वाले सहकरिता चुनाव के निर्वाचन अधिकारी थे ..उनके देर तक कार्यालय न पहुचने के बाद BDO ने एक कर्मचारी को उन्हें बुलाने भेजा तो इस कर्मचारी ने दरवाजा अंदर से बंद पाया और बहुत दस्तक के बाद भी वो नही खुला .. 

आखिरी विकल्प के रूप में जब धक्का दे कर दरवाजे को खोला गया तो सामने एडीओ पंचायत की नाइलोन रस्सी के सहारे सीलिंग फेन में पंखे से लटकती लाश दिखी जो तत्काल बी डी ओ को बताया गया जिसके चलते कुछ ही समय मे ब्लॉक मे हड़कम्प मच गया। इस मुद्दे पर जब सुदर्शन न्यूज़ प्रतिनिधि ने स्थानीय अधिकारियों से सम्पर्क किया तो बताया गया कि इनकी डायरी से एक सुसाइड नोट मिला है..इस पूरी घटना के पीछे सरकारी अधिकारियों पर जबरदस्त और जबर्दस्ती का दबाव बना रहे वो तमाम साजिशकर्ता ही हैं जिन्होंने एक के बाद एक सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों पर निशाना साधा है …

कहीं न कहीं ये घटना बांदा के उन अधिकारियों की व्यथा बता रही है जो एक एक कर के साजिशकर्ता के बुने जाल में फंस रहे हैं …यदि इस पर जल्द से जल्द लगाम नहीं लगाया गया तो आने वाले समय मे शायद ही कोई ऐसे विषम हालात में नौकरी कर सकें …मृतक के परिजनो का रो रो कर बुरा हाल है और इस मामले में मिली तहरीर पर जांच चल रही है ..

सवाल ये भी है कि क्या गारंटी है कि आगे से कोई अधिकारी ऐसे आत्मघाती कदम नहीं उठाएगा ? प्रश्न ये भी है कि दुर्दान्त आतंकियों तक के लिए जो मानवाधिकार दहाड़े मार देता है वो ऐसे मामले में खामोश क्यो हो जाता है ? हत्या जैसे संगीन आरोप को अपने सर पर पिछले 20 दिनों से ज्यादा समय तक ढो थे SDM वाले जिले में ADO ने खतरे की जो घण्टी बजाई है क्या कोई एक भी है उसे सुनने वाला ? अफसार के लिए अचानक टूट पड़ने वाला तथाकथित न्यायप्रिय समाज अधिकारियों संग होने वाले अन्याय पर खामोश क्यों ? आगे दबाव में यदि किसी और अधिकारी ने ऐसे आत्मघाती कदम उठाए तो उसका जिम्मेदार कौन ? ऐसे तमाम सवाल हैं जो शायद अनुत्तरित ही रहेंगे क्योंकि बांदा के बालू की चादर बहुत मोटी है जिसमे दफ़न हुआ राज कभी बाहर नहीं आता ।।


 

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