पुलिस अटल रही न्याय के पथ पर तो घरो पर लगा दिए पलायन के पोस्टर. एक बार फिर से रची जा रही ऐसे साजिश जिस से प्रभावित हो न्याय

खुद ही उन्माद फैलाया और उसके बाद अपने कृत्यों को ढकने के लिए Offence is the best defense का सहारा ले लिया . जिस मेरठ में कभी पिछली सरकारों में मज़हबी उन्माद की कई घटनाये हुई थी उसी मेरठ के कानून व्यवस्था को सही राह पर लाने के लिए पुलिस वालों ने चिलचिलाती गर्मी में पसीना बहाया और रात रात भर जागे .. कुल मिला कर पुलिस बल के अथक प्रयासों के बाद अब मेरठ में हुआ है कानून का राज़ और किया जा रहा है सिर्फ न्याय .. पुलिस की सख्ती ही है ये कि अपराधी को सिर्फ अपराधी की नजर से देखा जा रहा है न कि किसी मत या मज़हब के आधार पर .. 

लेकिन न्याय का ये रास्ता कुछ अन्याय पसंद लोगों को रास नहीं आ रहा . एक बार फिर से जगी है असहिष्णुता की पूरी टीम और साजिशों का दौर हो गया शुरू . उत्तर प्रदेश पुलिस की मेरठ पुलिस पर लगाए गए आधारहीन आरोप .. मामला है मेरठ में 21 जून को हुए लिसाड़ी गांव में सांप्रदायिक बवाल का . यहाँ पुलिस की निष्पक्ष विवेचना को प्रभावित करने के लिए अपनाया गया  है एक नया हथकंडा जिसमे हथियार बनाया गया है पलायन को . पलायन करने की दुहाई देने वाले कई मुस्लिम परिवार हैं जो खुल कर आगे आ  कर कर्तव्यपरायण पुलिस पर लगा रहे हैं अपने साथ अन्याय करने का आरोप ..

असल में तुष्टिकरण के लत में कुछ लोग ऐसे चूर थे कि उन्हें कानून का शासन निश्चित तौर पर थोड़े समय बाद समझ में आएगा .. । बुधवार देर रात कई मुस्लिम  परिवारों ने पुलिस पर दबाव बनाने और अपने पक्ष से ध्यान हटाने के लिए क्षेत्र से पलायन का मौखिक एलान करते हुए अपने मकानों पर ‘यह मकान बिकाऊ है’ के बैनर लगा दिए हैं। उन्होंने पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाया है। प्रशासन पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए गांव से पलायन करने का ऐलान कर दिया है. लोगों ने बाकायदा अपने घरों के बाहर पलायन और मकान बिकाऊ के पोस्टर लगा दिए है.

यद्द्पि बैनर काफी जल्दबाजी में बनवाये गए क्योकि उसमे लिखी हिंदी भी शुद्ध नहीं है .. साम्प्रदायिक घटना को उसी बैनर में सम्पर्क दायिक घटना आदि लिख दिया गया है .. ऐसी बड़ी त्रुटि अक्सर तब होती है जब किसी चीज को किसी बड़ी और सोची समझी साजिश के तहत कम समय में अंजाम देना हो .. दरअसल मेरठ में गांव लिसाड़ी में दो सम्प्रदाय के लोगों के बीच 21 जून को बाइक की टक्कर को लेकर विवाद हुआ था.  पुलिस ने इस मामले में विधिवत सत्य को आधार बना कर विवेचना की और जो सही हुआ वही कार्यवाही की जिसके बाद आज तक अपनी एक भी गलती न लेने वाले कुछ लोग भड़क गए और एक पक्षीय कार्यवाही का आरोप लगाने लगे .. इसी मुद्दे को तूल देने और मामले को गर्माने के उद्देश्य से दूसरे पक्ष के लोगों ने अपने घरों के बाहर “ये मकान बिकाऊ है, यहां छोटी-छोटी बातों पर साम्प्रदायिक विवाद बनते हैं”, के पोस्टर चस्पा कर दिए और गांव के करीब 100 से अधिक घरों ने यहां से पलायन करने का फैसला कर लिया है.

इस मामले में चर्चा में आने के लिए उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की है या तो वो उनके यह मकान खरीद ले या दूसरे सम्प्रदाय के लोग उनके मकान खरीद लें ताकि यह लोग कहीं और जाकर शांति से रह सकें.  इस मामले में जो मुख्य नाम सामने आ रहे हैं वो हैं हाजी नूर सैफी, हाजी गुल मोहम्मद, रईसूद्दीन, हनीफ, शईदूद्दीन, अलाउद्दीन, जान मोहम्मद व नौशाद आदि जिनके अनुसार गांव में जरा-जरा से विवाद को लेकर सांप्रदायिक रंग दिया जाता है।इसलिए  अब वह गांव में नहीं रहेंगे। मकान बेचकर यहां से चले जाएंगे। स संबंध में एसपी सिटी रणविजय सिंह का कहना है कि मामले की जांच की जाएगी और जो भी दोषी होगा कार्रवाई होगी। पलायन किसी को नहीं करने दिया जाएगा। दोनों पक्षों को न्याय दिलाया जाएगा। उपरोक्त धर्मनिरपेक्षता के तमाम ठेकेदार तब खामोश थे जब पलवल में ट्रेन में सीट के झगड़े को गौ रक्षको का झूठा नाम दे कर साम्प्रदायिक रंग दिया गया .. बिजनोर में एक निर्दोष सिपाही कमल शुक्ला को मदद करने के बाद भी बलात्कारी बना कर उसकी फांसी साम्प्रदायिक रंग दे कर मांगी गयी तब भी ये चुप थे .. फिलहाल अभी मामले की जांच चल रही है लेकिन सराहना करनी होगी मेरठ पुलिस की जो ऐसे तमाम आरोपों के बाद भी सत्य और न्याय के मार्ग से ज़रा सा भी विचलित नहीं हुई …

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