“जो पुलिस हमारी रक्षा के लिए 24 घंटे और 365 दिन हाजिर है उन्हें क्यों न बांधे राखी” ?.. वही शना आ गयी है देवबंद के निशाने पर


इसको कट्टरपंथ की हद न माना जाए तो क्या कहा जाय . वो पुलिस वाले जो २४ घंटे समाज की रक्षा के लिए खड़े रहते हैं . जो एक फ्री के टोल फ्री नंबर पर तत्काल पहुच जाते हैं किसी की भी रक्षा करने के लिए उन पुलिस वालों को अगर कोई राखी बाँध देती है तो उसको सामना करना पड़ता है उन मजहबी उलेमाओं का जो केवल पुलिस पर आरोप लगाने के लिए अक्सर दिखाई देते हैं. लेकिन जब कोई उन्ही पुलिस वालों के लिए अपनापन दिखाता है तो उसको झेलना पड़ता है वो रूप जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर देने के लिए काफी होता है . ऐसे ही एक मामले का गवाह बन रहा है उत्तर प्रदेश का मुज़फ्फरनगर जिला .

इस जिले में एक मुस्लिम युवती द्वारा कई दुर्दांत अपराधियों को धूल चटा चुके वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को राखी बांधना उसको निशाने पर ले आया है मजहबी ठेकेदारों के निशाने पर . इस महिला का मुस्लिम होना ही बनाया जा रहा है विवाद का विषय जिसने बेहद पवित्रता और भावपूर्ण हो कर एसएसपी को राखी बाँधी थी . उसको नहीं पता था की वो इस पवित्र भावना से ही आ जायेगी कईयों के निशाने पर .. ये पूरा मामला है बीते 26 अगस्त का जब देश ही नहीं पूरी दुनिया भर में राखी का पर्व मनाया जा रहा था . इसी रक्षा बंधन के पर्व पर शना नाम की एक जागरूक मुस्लिम युवती नई मंडी थाना कोतवाली पहुची और पुलिस अधिकारियों को राखी बांधी जिसके बाद तोहफे में शना को एसएसपी अनन्त देव तिवारी ने नई मंडी कोतवाली की एक दिन की प्रभारी बना दिया था ।

अब इस मामले को लेकर शना के खिलाफ मोर्चा खोलकर देवबंद के उलेमाओं ने एक बार फिर से नई बहस को शुरू कर दिया है। यह मामला अब नई मजहबी चर्चा का विषय बन गया है। देवबंद के उलेमाओं द्वारा शना के राखी बांधने के विरोध पर बोलते हुए खुद शना ने मीडिया को बयान देते हुए कहा कि उन्होंने जो नाराजगी जताई है कुछ हद तक ठीक है ओर अगर मेने पुलिस वालों को राखी बांधी है वे लोग 365 दिन साल के हमारी रक्षा करते है वे ये नयी देखते की वो हिन्दू है या मुसलमान है . अगर मेने जाकर उनको राखी बांध दी तो उसमें ऐसी कोई बेपर्दगी नही हुई और ना ही कोई ऐसी बात हुई जो वे लोग बोल रहे है, हम लोग बुरखे में गए थे ऐसे ही बिना पर्दे के नही गए थे, उन्होंने कहा है कि आपने गेर मर्द को छुआ है, गैर मर्द कहा से हो गए है वो हमने उन्हें दिल से भाई माना है और उन्होंने हमें दिल से बहन माना है और जब बहन भाई का रिश्ता हो गया तो फिर गैरमर्द कहा हो गए, वे हमारे भाई है हमने उनके राखी बांधी है भाई बहन का रिश्ता है में इस बारे में यही कहना चाहूंगी, उन्होंने जो किया ठीक किया और मैने जो किया ठीक किया मुझे अपने किये हुए में कोई गलती नही लगी। 


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