अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में लड़कों के लिए घोषित हुआ ये ड्रेस कोड गवाही है कि किस राह पर है देश में मज़हबी विचारधारा

ये वही जगह है जो अभी हाल में ही पाकिस्तान को बनाने वाले और जबरन भारत से अलग करने वाले मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर लगाने और उसको न हटाने के लिए पूरे देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक में विवादित रहा . फिर इसके बाद यहाँ हिन्दू छात्रों ने अपने साथ हो रहे भेदभाव को मुद्दा बनाया था . इसी विश्वविद्यालय में जिन्ना की तस्वीर कायम रखने के लिए हामिद अंसारी जैसे लोगों ने भी बयानबाजी कर डाली थी .

विदित हो की अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) ने शाह सुलेमान हॉल के बॉयज हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को अपने कमरे से बाहर निकलने के समय शॉर्ट ड्रेस और चप्पल नहीं पहनने के लिए कहा है. इतना ही नहीं वहां रहने वाले छात्रों को अहम मौकों और यूनिवर्सिटी के समारोहों में काली शेरवानी पहनने के लिए कहा गया है. यहां के प्रशासन ने एक परामर्श जारी किया है जिसमें एएमयू की ‘मूल परंपराओं’ की लिस्ट है.

‘बिना वाजिब पोशाक के बाहर न निकलें’. इस आदेश में कहा गया है,”वाजिब ड्रेस में ही छात्रावास से बाहर निकले. कुर्ता और पायजामा, चप्पल पहनकर हॉल परिसरों से बाहर नहीं निकलें. अभी हाल में ही योगी आदित्यनाथ द्वारा इमारतों के भगवाकरण आदि के मामले को मुद्दा बना कर जिस प्रकार से सेकुलर और बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा विवाद खड़ा किया गया था उनमे से किसी एक ने भी अभी इस मामले में आवाज नहीं उठाई है और उसको मूक समर्थन देते दिख रहे हैं . छात्रों को काली शेरवानी का निर्देश देना ये साबित कर रहा है की अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में सिर्फ कोर्स की किताबों की ही नहीं बल्कि शिक्षा मिल रही कई और भी .

Share This Post