#PACDay2017 पर आज सैल्यूट करें उन रक्षको को जो अपनी वर्दी पर ले लेते है हर वो आफत जो आई रहती है समाज पर


पीएसी (प्राविंसियल आ‌र्म्ड कांस्टेबुलरी) एक ऐसा बल है जो संकट के समय आम जनमानस के लिए राहत का एक रूप और अपराधियों और असमाजिक तत्वों के लिए आफत का पर्याय बन कर सामने आया है . एक दो नहीं बल्कि अनगिनत बार PAC के जवानों ने अपनी जान पर खेल कर समाज को निर्भयता दी और सामाजिक शान्ति को स्थापित किया है . इस बल के अनेक जवान हर पल आने वाले चुनौती के लिए तैयार बैठे रहते हैं. जब देश की सरहदों पर हमारी फ़ौज के जवान बाहरी शत्रुओं के देश की रक्षा करते हैं ठीक उस समय PAC और पुलिस के जवान देश के अंदर रहने वाले नागरिकों के लिए रक्षक के रूप में तैनात रहते हैं और समाज पर आने वाले हर संकट को सबसे पहले अपने ऊपर लेने के लिए जल्द से जल्द हाजिर हो जाते हैं .

एक प्रकार से दिखा जाए तो पुलिस का कार्य भी उतना आसान नहीं जितना कोई समझता होगा . ये वो बल है जिसे समाज के अन्दर छिपे अपराधी पहचानने भी होते हैं और उन पर कार्यवाही भी करनी होती है . अनगिनत बंदिशों और तमाम नियम कानूनों ने बंधे जवानो को आप ठंडी , गर्मी , बारिश में अपने नजदीक के चौराहों और प्रतिष्ठानों पर ड्यूटी पर तैनात देखा जा सकता है . सीमत संसाधन और साधारण वेतन पर कार्य करने वाले इन जवानों को कई कई बार तो अतिव्यस्तता के चलते खाना खाने का भी समय नहीं मिल पाता पर फिर भी बिना किसी शिकन के ये समाज की रक्षा के लिए खड़े रहते हैं .

एक बड़ी आबादी को सीमित संख्या में और सीमित संसाधन में सम्भालना और सुरक्षा देने का बड़ा जिम्मा है इन जवानो के कंधों पर जिसे ये 24 घंटे बिना शिकायत के पूरा भी करते हैं .  पीएसी का मनोबल बढ़ाने के लिए यह स्लोगन लिखा गया कि “सर्वोत्तम बल” ।  : उत्तर प्रदेश पीएसी के पूर्व महानिदेशक श्री रंजन द्विवेदी जी के अनुसार मनोबल बढ़ाने को लिख गया था सर्वोत्तम बल का स्लोगन , इस स्लोगन से संकट काल में सदा आगे आने वाले PAC के जवानो का मनोबल बढ़ता है और समाज की शान्ति और सुरक्षा के लिए सर्वोत्तम कार्य हेतु स्वतः ही प्रेरणा मिलती है . यद्दपि उनका कहना था कि कहीं किसी प्रतियोगिता के बाद उसे सर्वोत्तम बल की पदवी नहीं मिली है। हर फोर्स का अलग-अलग स्लोगन होता है। पीएसी का भी यह एकस्लोगन है। यहाँ ये भी ध्यान रखने योग्य है कि देश के सुरक्षा बलों में आपसी प्रतियोगिता नहीं बल्कि आपसी सामंज्यस जरूरी होता है और PAC ने कई बार CRPF , SSB , BSF और सेना के साथ कंधे से कंधा मिला कर इसको साबित भी किया था . 

दरअसल यह पीएसी सर्वोत्तम बल का आइडिया दिल्ली से आया था। बताया जाता है कि काफी समय पहले है जब दिल्ली में दिल्ली पुलिस का संख्या बल कम होने के चलते विभिन्न प्रदेशों की फोर्स वहाँ तैनात होती थी। उसमें यूपी की पीएसी भी  जाया करती थी। सभी की ड्यूटी दिल्ली पुलिस की तरफ से लगाई जाती थी। उस समय दिल्ली के अधिकारियों द्वारा यूपी पुलिस की काफी प्रशंसा की जाती थी। दिल्ली के अधिकारी कहते थे कि यूपी की पीएसी हर परिस्थिति में अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से करती है। सुख-सुविधाओं की उसकी मांग बहुत कम रहती है, वर्ष 2004 में पीएसी के तत्कालीन डीजी (डायरेक्टर जनरल) श्री यशपाल सिंह की पहल पर पीएसी के वाहनों पर सर्वोत्तम बल लिखा गया। उन्होंने पीएसी का मनोबल बढ़ाने के लिए ऐसा किया था। 
आज उसी PAC दिवस पर सुदर्शन परिवार उन सभी वीर जवानो को नमन करता है जिन्होंने सदा जरूरी पड़ने पर संकट और शान्ति काल दोनों में बिना विचलित हुए इस धरा की रक्षा की और सामाजिक शांति और सौहार्द को बनाए रखा . 


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