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इलाहाबाद रेंज पुलिस- अपने ही सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र पर ऐसी कार्यवाही कि 3 साल से जमानत नहीं ,लेकिन अपराधी सऊद को 3 मिनट भी जेल नही

यदि आप को लगता है कि पुलिस का शत्रु अपराधी है तो यकीनन आप गलत नहीं हैं क्योकि पुलिस विभाग का निर्माण ही अपराध के दमन के लिए हुआ है . अब बात कर लेते हैं उत्तर प्रदेश पुलिस की जो यकीनन चित्रकूट में बलिदान हुए सब इंस्पेक्टर जे पी सिंह , शामली में अमरता को प्राप्त हुए सिपाही अंकित तोमर जैसे वीरों के गौरवशाली इतिहास से सदा ही गौरवान्वित रहेगी.. लेकिन एक क्षेत्र विशेष के कुछ गिने चुने पुलिस वालों की कारस्तानी जब सामने आती है तो एक बार सवाल खड़ा हो ही जाता है कि क्या सच में पुलिस विभाग का दुश्मन केवल अपराधी है ? उनके अपने नही ?

ज्ञात हो कि इलाहाबाद पुलिस का एक सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह जो कभी नारी बारी पुलिस चौकी का इंचार्ज हुआ करता था उस पर कचेहरी में प्राणघातक हमला हुआ था जिसमे उसकी जान तक जाने का अंदेशा था . हमला करने वाले का नाम नबी अहमद था जो कम से कम आधा दर्जन मुकदमों में नामजद था . कहा जाता है कि अपनी जान बचाने के लिए सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह ने गोली चला दी थी जिसमे हमलावर नबी अहमद मौके पर ही मारा गया था . इस पूरी घटना का वीडियो भी जनता में वायरल हुआ है जिसमे नबी अहमद को सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की पिटाई करते हुए देखा जा सकता है .

फिर रोल आता है इलाहाबाद परिक्षेत्र की पुलिस का जिसने अपने ही विभाग के सब इंस्पेक्टर को सलाखों के पीछे भेजने के लिए दिन रात एक कर दिया और आत्मरक्षा करने वाले उस सब इंस्पेक्टर को हत्यारा घोषित करवा कर ऐसी धाराएँ ऐसी विवेचना कर के लगा दी कि तीन साल से उसको पल भर की भी जमानत नही मिली और न ही कोई आगे आशा दिख रही है क्योंकि मुकदमे बाजी अदि के चलते उसका परिवार आर्थिक रूप से तबाह हो गया और उसकी तीन बच्चे अपनी माँ के साथ सडक पर आने की कगार पर आ गये.. पति के जीते जी भी विधवा जैसी हो चुकी उस सब इस्पेक्टर की पत्नी ने अपने पति की रक्षा के लिए ऐसी कोई चौखट नहीं थी जहाँ मत्था नहीं टेका लेकिन इसी इलाहाबाद की पुलिस के तमाम बहादुर अधिकारी सीना ठोंक कर बहादुरी दिखाते रहे कि उन्होंने अपने ही विभाग के एक सब इंस्पेक्टर पर ऐसी कार्यवाही की है कि उसको अंतिम सांस तक जेल काटना है .. लेकिन यहाँ कुछ दिन बाद अचानक ही मामला करवट लेता है . 

एक बार फिर तीन साल बाद उसी रेंज की पुलिस को एक और जांच मिलती है . उस जांच में एक महिला BDO अधिकारी रो रो कर आरोप लगाती है कि उसके कार्यालय में घुस कर उसको मार डालने तक की नीयति रख कर एक अपराधी मोहम्मद सउद अपने तमाम गुंडों के साथ हथियार लहराता है और एक महिला के साथ जितनी भी अभद्रता हो सकती है वो करता है .. लेकिन इस बार इलाहाबाद रेंज की पुलिस में वो तेजी नहीं दिखती .. जो जोश नहीं दीखता और वो आक्रोश नहीं दिखता .. ब्लाक प्रमुख साहब तक कहने वाले तमाम अधिकारी पूरा मौक़ा देते हैं कि नेता जी अपनी जमानत आदि का प्रबंध कर लें . उन्हें न सिर्फ सरेंडर का मौक़ा मिल जाता है अपितु उनको वकील करने आदि की भी पूरी आज़ादी मिलती हैं . हां , दिखाने के लिए उनके घर के आस पास सिपाही आदि भेज कर दिखाया जाता है कि मेहनत चल रही है . 

इसमें सुशासन का दवा करने वाले उपमुख्यमंत्री तक भी संज्ञान में रहते हैं और उसको स्थानीय कार्यों की रिपोर्ट देते रहने वाले एक विधायक जी भी जो न्यूज़ चैनल का फोन जाने के बाद समय नहीं है या बात नहीं हो सकती कह कर किनारा करते है लेकिन पूरी घटना में भूमिका निभाते रहते हैं . सबको पता है कि अपराधी और नेता जी कहाँ और कितना जुड़े हैं फिर भी सत्ता है इसलिए खामोश रहते हैं .. इस बीच में अपराधी सऊद बिना 3 मिनट भी जेल गये जमानत पा जाता है और सीधे आ कर अपने कार्यालय में भोली भाली जनता को अपनी हैसियत का अंदाज़ा करवा देता है . योगी आदित्यनाथ जी के गृह जनपद में यदि किसी भाजपा सांसद पर कोई अल्पसंख्यक जमीन हडपने का आरोप लगाता है तो उसकी कुर्सी तक हिल जाती है लेकिन केशव प्रसाद मौर्य के गृह जनपद में कोई महिला अधिकारी रो रो कर न्याय मांगती है तो अपराधी 3 मिनट में जमानत ले कर सामने आ जाता है . 

दर्जन भर नामजद अभियुक्तों में से एक भी इतना दोषी नहीं लगता कि उसके खिलाफ अच्छी पैरवी की जाय और न्यायालय से उसको जमानत पाने से रोका जाय . सब के सब सरेंडर करते हैं क्योकि पीडिता एक महिला है और वो अभी सरकारी अधिकारी .. उसके ऊपर जांच आदि के अलावा ट्रांसफर आदि के तमाम अधिकार उन सभी माठाधीशो के हाथ में हैं जो अब उसी इलाके के माननीय बन कर घूम रहे हैं . ज्यादा बोलेगी तो नेता जी उसका ट्रांसफर ऐसी जगह करवा देंगे जहा एक महिला के लिए ठीक नहीं होगा .और फिर दम तोड़ देती है वो आवाजें . जहाँ महिला अधिकारी की आवाज दम तोडती है और सऊद जैसों की आवाज बुलंद करती ये कहानी है उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जनपद के मूरतगंज ब्लाक की जो है उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी का गृह जनपद और एक नामी माननीय विधायक संजय कुमार गुप्ता की विधानसभा जो मौर्य जी के करीबियो में गिने जाते हैं . 

इस पूरे मामले में जून महीने में आने वाले स्थानीय चुनावों के समीकरण भी सामने आ रहे हैं जिसमे प्रभावशाली नेताजी को इलाके में बहुतायत मुस्लिम वोट भी लेने हैं . सऊद ज्यादा तंग होगा तो वोटो का सरकना तय है इसको भी जनता दबी जुबान से स्वीकार कर रही है .. ये नेता जी वहीँ हैं जो जय श्री राम के नारे के दम पर जीत कर आये हैं..   इसी रेंज की पुलिस की जांबाजी के चलते 3 साल से तबाह हो चुके सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह का सवाल है अपने ही रेंज की पुलिस से कि क्या उसका दोष केवल इतना ही है कि उसका नाम शैलेन्द्र है सऊद नहीं ? सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की पत्नी सपना सिंह को आशा थी योगी जी के शासन से कि उनके आने के बाद उन्हें न्याय मिलेगा लेकिन सपना सिंह शायद श्वेता सिंह को नहीं जानती , अगर जानती तो उनको ये आशा कतई नहीं होती .  फिलहाल कशाम्बी पुलिस के इस जांबाजी भरे कार्य को सुदर्शन न्यूज़ लगातार जनता और शासन तक प्रचारित करता रहेगा जिस से जनता भी अपने रक्षको की बहादुरी जान कर उन पर गर्व कर सके . 

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