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वर्दी में नेतागीरी. कर्तव्य के बजाय ध्यान था राजनीति पर. क्या इसीलिए बनाया जातिवाद को ढाल ? या शायद रास नहीं आया “मुगलसराय” का बदला हुआ नाम

उसने तन पर वर्दी पहन रखी थी, कंधे पर दो सितारे भी चमक रहे थे लेकिन मन में था कुछ और साथ ही चमकते सितारों के पीछे था एक स्याह काला मन जिसमे न सिर्फ सत्ता , शासन की बदनामी की इच्छा थी अपितु उस अधिकारी के प्रति भी द्वेष भाव था जिसने उस से केवल इतना कहा था कि – अपनी ड्यूटी सही से करना ” .. ये बात हो रही है उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले की जहां के मुगलसराय स्टेशन का नाम हाल में ही बदल कर दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन पड़ा है जिसका राजनैतिक गलियारों में मिला जुला असर है ..

ध्यान देने योग्य है कि अभी कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी को खुफिया इनपुट के आधार पर खतरा बताया गया था , इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह के काफिले के आगे भी प्रयाग में कुछ समाजवादियों द्वारा बेहद ही अशोभनीय हरकत की गई थी जो उनकी सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी उचित नहीं थी..समाजवादियों की ऐसी ही अशोभनीय हरकत का शिकार योगी आदित्यनाथ जी का काफिला लखनऊ विश्वविद्यालय के सामने हो चुका था ..और ये दोनों ही राजनैतिक हस्तियां एक साथ एक समय पर चंदौली जिले में थीं जिनके साथ केशव प्रसाद मौर्य जी उपमुख्यमंत्री भी थे ..उपरोक्त से जाना जा सकता है कि सुरक्षा व्यवस्था के लिए चंदौली जिले के पुलिस अधीक्षक ने कितनी जी तोड़ मेहनत की रही होगी ..

सब कुछ सही सलामत बीत भी गया, यद्द्पि एक स्थान पर विरोध करने की कोशिश समाजवादी कार्यकर्ताओं ने की और सुनियोजित रूप से अराजकता फैलाने की चाहत रखी, जिसकी मुख्य वजह वहाँ पर ड्यूटी पर तैनात सब इंस्पेक्टर प्रमोद यादव की  इस अतिमहत्वपूर्ण सभा मे भी अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीनता रही ..सभी अराजक लोग उधर से ही घुसे जहां सब इंस्पेक्टर प्रमोद यादव की ड्यूटी थी जिसमे माना जा रहा है कि इन्होंने उन्हें रोकने, तलाशी लेने आदि के प्रयास जानबूझ कर नही किये..ये घटना दिनांक 05/07/2018 की है ..

इसको कहना गलत नहीं होगा कि उत्पात फैलाने की सोची समझी साजिश में कहीं न कहीं से सब इंस्पेक्टर प्रमोद यादव की संलिप्तता जरूर रही होगी क्योंकि किसी भी अन्य पुलिस वाले की ड्यूटी स्थल पर सब कुछ शांत रहा .. यद्द्पि प्रमोद यादव ने  भले उन उत्पतियो को रोकने की कोशिश न किया हो लेकिन वहां मौजूद अन्य पुलिस कर्मियों ने सतर्कता दिखाते हुए उन सभी को समय रहते काबू किया जो यकीनन बड़ी साजिश रच कर आये थे .. सब कुछ शांत व सही से बीत जाने के बाद जब पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कुमार सिंह जी ने सब इंस्पेक्टर प्रमोद यादव से कार्य के प्रति लापरवाही का कारण पूछा तो उसने अचानक ही अपना रंग बदल दिया … बताया ये भी जा रहा कि वहां आये भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने बाद में सब इंस्पेक्टर के व्यवहार से असन्तोष भी जताया जो कुछ की तलाशी के नाम पर अभद्र भाषा आदि का प्रयोग कर रहा था..

ये उच्चतम स्तर की भूल थी जिस पर सब इंस्पेक्टर प्रमोद यादव पर कार्यवाही तय थी और खुद को फंसता देख कर दुर्दांत अपराधियों वाले सिद्धांत Offense is the best defence को अपनाया .. आश्चर्यजनक रूप से प्रमोद यादव जल्द ही मीडिया से  घिरे नजर आए ..पुलिस वाले का दर्द सुनने के लिए इतनी जल्दी इतनी संख्या में उस मीडिया का घेरा बना लेना भी हैरान कर देने वाला था जो पिछले 3 साल से जेल में अंतहीन प्रताड़ना झेल रहे इलाहाबाद के सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह को एक बार भी देखने तक नही गए ..यद्द्पि सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उक्त सब इंस्पेक्टर का कैरियर भी शिकायतों से भरा हुआ है और अपने क्षेत्र में एकतरफा कार्यवाही के लिए विख्यात रहे हैं.इसकी वर्तमान पोस्टिंग जौनपुर में बताई जा रही है ..

यहां पर जिस पुलिस वाले की समाज को जोड़ कर चलने की जिम्मेदारी होती है उसी पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर ने दिया घोर आपत्तिजनक बयान .. जिस जातिवाद को आधार बना कर कुछ लोगों ने सहारनपुर, मध्यप्रदेश, गुजरात जैसे स्थानों को दंगे की आग में झोंक दिया उसी जातिवाद को समाज की रक्षा के दायित्व को धारण किये एक पुलिस वाले ने अपनी खुद की रक्षा का ढाल बना डाला .. प्रमोद यादव ने पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कुमार सिंह जी पर यादव होने के नाते प्रताड़ित करने का आरोप लगाया और कहा कि उन्हें बोला गया कि अब ये भाजपा की सरकार है जिसमे यादवों की नही चलेगी .  

पहले चर्चा पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कुमार सिंह जी की .. अभी हाल में ही उत्तर प्रदेश के शीर्ष कुशल नेतृत्वकर्ताओ का पुरष्कार मिला.. अक्सर DGP महोदय द्वारा जारी की जाने वाली टॉप 3 रैंक में चंदौली पुलिस भी होती है जिसका श्रेय सन्तोष सिंह जी के कुशल नेतृत्व को जरूर जाता है .. इनके खुद के नेतृत्व वाले पुलिस बल में कई यादव व अन्य सभी जातियां व धर्म, मत , मज़हब के लोग हैं लेकिन इन्होंने आज तक किसी को योग्य – अयोग्य, सक्रिय  – निष्क्रिय आदि के ही आधार पर देखा है .. यकीनन ऐसे आरोपों से वो मानसिक रूप से आहत होंगे लेकिन भी भी समाज के रक्षा के अपने दायित्व पर अटल हैं ..रही बात सरकार की तो इस सरकार के केंद्रीय सत्ता व प्रादेशिक सत्ता मिला कर कई विधायक, सांसद, मंत्री यादव जाति से हैं जो अच्छा खासा रुतबा भी रखते हैं ..फिर “ये सरकार भाजपा की है , इसमे यादवों की नहीं चलेगी ” जैसे आरोप एक सब इंस्पेक्टर द्वारा लगाना हर हाल में सत्य से कोसों दूर प्रतीत होता है .. फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच चल रही है लेकिन वर्दी वालों को जातिवादी ढाल किसी भी रूप में शोभा नहीं देती .. 

पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कुमार सिंह- 


 

साभार – श्री प्रशांत सिंह

संवाददाता-  चंदौली , उत्तर प्रदेश

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