बेहद नाजुक दौर में था UP. कई जिलों में सरकारी स्कूलों के नाम में जोड़ दिया गया था “इस्लामिया”. होती थी जुमे की छुट्टियाँ और बाकायदा मज़हबी इबादत

ये थी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता से उपजी वो बेल जो फलते फूलते हुए धीरे धीरे उस वृक्ष को ही चपेट में ले ली थी जिसने उसको सहारा दिया था . ये उत्तर प्रदेश का शिक्षा तंत्र था जो पिछली सरकारों में इस कदर हो गया था कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सरकारी स्कूलों के नाम में बाकायदा इस्लामिया लिखा जाने लगा था और न सिर्फ इस्लामिया लिखा जाने लगा अपितु वहां वो सभी इस्लामिक रीति रिवाज़ अपनाए जाने लगे थे जो बाकयदा मदरसों में अपनाए जाते हैं . 

ज्ञात हो कि देवरिया से खुला राज अब धीरे धीरे पूरे प्रदेश का दर्द बन कर सामने आया है . उत्तर प्रदेश के कई जिलों के स्कूल बाकायदा मदरसे के रूप में आ गये थे जहाँ हिन्दू सिख ईसाई बच्चे पढने जाते थे . अब तक मिली जानकारी के अनुसार ये उन्ही स्थानों पर हुआ है जहाँ अध्यापक मुस्लिम थे.. देवरिया से चला ये सिलसिला अब श्रावस्ती , फैजाबाद , सुल्तानपुर और जालौन तक पहुच गया है . यहाँ सरकारी स्कूलों के सभी नियम कानून ठीक उन मदरसों जैसे हो गये हैं जहाँ मुस्लिम बच्चो को इस्लामिक शिक्षा की तालीम दी जाती थी . पहले धीरे धीरे शुक्रवार को खुद अध्यापक अपनी नमाज़ आदि के लिए छुट्टी पर रहने लगे , फिर उन्होंने पूरे स्कूल आदि की छुट्टियाँ करना शुरू कर दिया .

इन तमाम घटनाओ की जानकारी स्थानीय प्रशासन और शासन तक थी लेकिन वो सब के सब निभा रहे थे तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के वो सिद्धांत जिसे जिन्दा रखने के लिए आज सभी पार्टियाँ २०१९ चुनावों में गठबंधन करने जा रही हैं . जब अधायपक की आड़ में छिपे मजहबी कट्टरपन्थियो को ये लगने लगा कि उनके कार्यों को शासन की मौन सहमति है तो उन्होंने अपने हौसले और बुलंद कर दिए और स्कूलों के आगे सीधे सीधे पेंट करवा दिया और स्कूल को खुद से इस्लामिया स्कूल घोषित कर दिया . वहां पढने वाले हिन्दू और सिख बच्चो को भी वही नियम मानने थे जो वहां लगाए जाते थे . जालौन जिले के बनाए जा रहे इस्लामिया स्कूल का पता थाना कदौरा, डाकघर कदौरा , तहसील कालपी जिला जालौन , पिन – 285203  बुंदेलखंड उत्तर प्रदेश डाकघर के थोड़ी आगे पुराने थाने की तरफ वाला मार्ग है .. 

बताया जा रहा है कि धीरे धीरे इन स्कूलों में वन्देमातरम , भारत माता की जय आदि प्रतिबंधित कर दिया गया था . वहां पर मुस्लिमों के त्यौहार आदि मनाये जाने लगे थे और इबादत आदि के तौर तरीके सिखाये जाने लगे थे . इतिहास के उन मुस्लिम की जानकारी मासूम बच्चों को दी जाने लगी थी जिनका पाठ्यक्रम में नाम भी नहीं था . आम जनता इस रहस्योद्घाटन से हतप्रभ है और वो योगी आदित्यनाथ की सरकार का धन्यवाद कर रही है . जनमानस का कहना है कि यदि योगी सरकार न आती तो उन्हें पता भी नहीं चलता कि उनके नौनिहालों को स्कूलों में क्या पढ़ाया जा रहा है .. इस मामले में अब सरकार गंभीरता से कदम उठाने शुरू कर चुकी है और योगी सरकार ने उन स्कूलों की लिस्ट देने के लिए कहा है जिन्हें जाति या धर्म आदि से सम्बोधित किया जा रहा है . जनता के मन में पूर्ववर्ती सरकारों के लिए भी आक्रोश है जिन्हें जनता इस साजिश में में बराबर का भागीदार मानती है .. फिलहाल इस मामले में अभी तक तथाकथित सेकुलर शक्तियाँ खामोश हैं ..  

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