श्रीराम मन्दिर निर्माण को लेकर जिन मौलानाओं से सुलह की कोशिश कर रहे हैं ये हिन्दू धर्मगुरु उन मौलानाओं ने की सरेआम बेइज्जती…जानिए क्या हुआ

अयोध्या में राम जन्भूमि पर श्रीराम मंदिर निर्माण विवाद सुप्रीम कोर्ट है. अगर ये मुद्दा बातचीत से सुलझ जाता तो आज हिंदुस्तान की पहिचान प्रभु श्रीराम तम्बू में नहीं होते. अगर इस्लामिक मौलाना हिन्दू भावनाओं की कद्र करते, इनको देश में शांति, अमन की परवाह होती तो आज अयोध्या में रामजन्मभूमि पर रामलला का भव्य मंदिर बन गया होता, हमारे अराध्य एक टेंट में नहीं विराज रहे होते.

बातचीत, आपसी सौहार्द्र से इस मामले को हल करने के काफी प्रयास किये गये हैं लेकिन इस्लामिक मौलानाओं ने इसको सीरियस नहीं लिया. इस सबके बाबजूद आर्ट ऑफ़ लिविंग के पर्मुख तथा हिन्दू धर्मगुरु श्री श्री रविशंकर फिर उन्ही मौलानाओं से बातचीत के द्वारा रामंदिर विवाद का हल खोजने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन कल बरेली में इन मौलानाओं ने श्री श्री के साथ जो दुर्व्यवहार किया उनका अपमान किया तब इनसे किसी तरह से सौहाद्र या प्रेम की उम्मीद करना बहुत बड़ी मूर्खता ही होगी.

श्री श्री रविशंकर बरेली के मदरसे में राम मन्दिर पर बातचीत के लिए गये जहाँ मौलानाओं ने बात करना तो दूर उन्हें मदरसे में घुसने तक नहीं दिया गया. श्री श्री 15 मिनट तक मदरसे के गेट पर खड़े रहे लेकिन मदरसे में नहीं जा सके तथा बेरंग वापस लौट आये. आखिर क्या सोच रही होगी उन मौलानाओं की जिन्होंने अतिथि बनाकर आये श्री श्री को मदरसे में अंदर तक नहीं जाने दिया इसको जानना मुश्किल नहीं है.

जो मौलाना मदरसे में श्री श्री रविशंकर को प्रवेश तक नहीं करने दिए, खुद चलकर गये श्री श्री रविशंकर से जिन मौलानाओं ने मुलाकात तक नहीं की. वे मौलाना वार्तालाप के द्वारा राम मन्दिर विवाद को सुलझा लेंगे तथा अयोध्या में मन्दिर निर्माण के लिए सहमत हो जायेंगे ऐसी बात सोचना भे हास्यास्पद लगता है. जिनका पूरा इतिहास ही हिन्दुओं के दमन, हिन्दुओं पर अत्याचार व हिन्दुओं के अपमान से भरा पड़ा हो उनसे सौहार्द्र की उम्मीद करना ही बेकार है. इस सबके बाद शायद अब श्री श्री इस मुद्दे को न्यायलय के भरोसे ही छोड़ दें वही बेहतर है.

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