एंबुलेंस का नाम ही काफी नही…बल्कि सुविधा भी मिलनी चाहिये

इटावा:  सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एंबुलेंस की सेवाओं की कितनी भी तारीफ करे उतनी ही कम है लेकिन वास्तव मे एक आम आदमी एंबुलेंस का फायदा कभी भी नही उठा सकता। ऐसा ही एक मामला सोमवार को भीमराव अंबेडकर संयुक्त चिकित्सालय में सामने आया। एक पिता मजबूर होकर अपने 15 साल के बेटे की डेड बॉडी को अपने कंधे पर उठाकर घर ले आये। पीड़ित पिता का आरोप है कि डॉक्टर ने उनकी सहायता नही की और बेटे को ले जाने के लिये ना तो डॉक्टर ने स्टैचर और ना ही एंबुलेंस की सुविधा कराई।

 नही की एंबुलेंस की मांग……..

डॉक्टर का कहना है कि पिता ने एंबुलेंस की कोई भी मांग नही की और बिन बताये ही इमरजेंसी वार्ड से बाहर चला गये। सिविल लाइन थाना क्षेत्र के विक्रमपुरा गांव का रहने वाला उदयवीर अपने 15 वर्षीय पुत्र पुष्पेंद्र को लेकर जिला अस्पताल पहुंचा था। उदयवीर ईंट भट्ठे पर मुनीम है। उसके पुत्र के पेट में दो दिन से दर्द हो रहा था। जब वह अस्पताल में इमरजेंसी में तैनात डाक्टर पीयूष त्रिपाठी के पास पहुंचा तो उन्होंने उसे देखकर बताया कि इसकी मौत हो चुकी है। उसके हार्ट व फेफड़े काम नहीं कर रहे थे। उदयवीर डाक्टर को दिखाने के बाद अपने पुत्र को कंधे पर लादकर अस्पताल परिसर के बाहर ले आये। पिता ने कहा-

डॉक्‍टरों ने उसके बेटे का इलाज नहीं किया…..

.पिता ने आरोप लगाया है कि किसी ने मुझे नही कहा है कि बाँडी को घर ले जाने के लिए कि एंबुलेंस की सुविधा है और मैं अपने को अपने कंधे पर डालकर आँटो तक लेकर गया। अस्पताल में तैनात चिकित्सक पीयूष त्रिपाठी ने अपने बयान मे कहा है कि पुष्पेंद्र की जांच की गई थी। वह मृत अवस्था में आया था तब तक उस मे कोई सांस नही थी। इसी बीच भरथना में बस दुर्घटना के यात्री आ गए जिसके कारण अस्पताल के लोग उसमें व्यस्त हो गए। उसने एंबुलेंस की मांग किसी से नहीं की और बिना बताए ही पुत्र को लेकर चला गया।

वहीं, पूरी घटना सोशल मीडिया में आने पर शाम को सीएमओ डॉ. राजीव यादव जिला अस्पताल में जांच करने पहुंचे। उन्होंने बताया कि मामले की जांच पूरे तरीके से की जाएगी। अगर अस्पताल प्रशासन की लापरवाही है तो इसमें पूरे तरीके से कार्रवाई की जायेगी।  उदयवीर से भी मामले में पूछताछ की जाएगी कि उसने एंबुलेंस की मांग की थी या नहीं।

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