जो भंसाली भक्त मांग रहे थे जौहर का सबूत उन्हें सुदर्शन दे रहा उस कलश का प्रमाण जिसमे अभी भी है रानियों की पावन राख


संजय लीला भंसाली में जो रानी पद्मावती का अधुरा इतिहास पेश किया गया. जिसका जम कर विरोध हो रहा है. लकिन कुछ ऐसे लोग भी देश में मौजूद है जो संजय लीला भंसाली का समर्थन कर रहे है. जिन्होंने सारी हदे पार करते हुए यह तक बोलने से नहीं हिचके कि इस बात का कोई सबूत ही नहीं है कि रानिपद्मावती ने जौहर किया था तो हम कैसे इसे मन ले. और यहाँ तक कि उन लोगो का मजाक उड़ाया जो रानी पद्मावती के मान सम्मान के लिए लड़ रहे है. तो यह खबर उन लोगों के लिए जवाब है जिन्होंने रानी पद्मावती के जौहर का मजाक उड़ाया.

बता दें कि संभल जिले के पवांसा में 200 वीरांगनाओं के संग जौहर करने वाली रानी पवांरनी के साथ चित्तौड़ की तीन रानियों के कलश स्थापित हैं।

इसमें रानी पद्मावती का भी कलश है। सभी कलश जौहर की माटी से भरे हुए हैं। इनके प्रति क्षत्रियों की श्रद्धा है और यहां पर 17 नवंबर को विरांगनाओं की याद में जौहर दिवस मनाया गया. वहीं पंवासा क्षेत्र की रानी पवांरनी ने 200 वीरांगनाओं के साथ 17 नवंबर को 1717 को जौहर कर लिया था। इस मौके पर जोहर स्थल की पवित्र माटी भी थी जिसे क्षत्रिय लोगों की श्रद्धा इतनी है कि वह उसे आज भी नमन करते हैं। हालाकि इस मौके पर वक्ताओं ने बताया कि पवांसा के जौहर स्थल पर 1984-85 में एक स्मारक स्थल बनाया गया। उसमें रानी पवंरानी के कलश के साथ राजस्थान के चित्तौड़ से तीन कलश लाए गए जिसमें एक रानी पद्मावती, दूसरा रानी कमलावती और तीसरा करुणावती था।

साथ ही क्षत्रियों ने एकत्र हो कर पद्मावती फिल्म में शामिल कलाकारों का विरोध करते हुए दीपिका पादुकोण के ऐसे बयानों के बाद उनका ही नहीं बल्कि पद्मावती फिल्म के निर्देशक भंसाली पर भी एकत्र लोगों द्वारा विरोध निकला और उनका पुतला भी जलाया. इससे पहले यज्ञ और हवन का आयोजन हुआ। साथ ही राष्ट्रपति को संवोधित ज्ञापन में निर्देशक के विरूद्ध देश द्रोह का मुकदमा लिख कर उसे जेल में डालने की मांग की गई।


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share
Loading...

Loading...