योगी सरकार नहीं चाहती UP में पद्मावती की रिलीज.. केंद्र को लिख कर भेजी आपत्ति


संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का चौतरफा विरोध हो रहा है. सभी हिन्दू समुदाय के लोग संजय लीला भंसाली और बॉलीवुड जगत के हिन्दू इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश करने की आदत से बेहत रोष में है. यूपी के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली आदि प्रदेशों में भी फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाये जाने को लेकर विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है। जिसके बाद अब यूपी सरकार ने भी यह कहते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है. उन्होंने पात्र में लिखा है कि फिल्म का रिलीज होना शांति व्यवस्था के लिए खतरा हो सकता है। यह पत्र यूपी के गृह विभाग ने केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव को लिखा है। पत्र में फिल्म की कहानी और ऐतिहासिक तथ्यों को कथित रूप से तोड़-मरोड़ कर पेश किए जाने की बात कहते हुए इस संबंध में केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) को अवगत कराने का अनुरोध किया गया है।

इस खत में अपील की गई है कि फिल्म के प्रमाणन पर निर्णय लेते समय बोर्ड के सदस्य जनभावनाओं को जानते हुए विधि अनुसार निर्णय लें। गृह विभाग ने पत्र में उल्लेख किया है कि संज्ञान में आया है कि फिल्म निर्माताओं द्वारा इस फिल्म को केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के समक्ष प्रमाणन हेतु प्रस्तुत कर दिया गया है, जिस पर निर्धारित प्रक्रिया अनुसार बोर्ड द्वारा विचार किया जाना है।

इंटेलिजेंस रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रमुख सचिव गृह ने अवगत कराया है कि 1 दिसम्बर, 2017 को निर्माता, निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होना प्रस्तावित है। 9 अक्टूबर, 2017 को इस फिल्म के ट्रेलर के लॉन्च होने के बाद से ही कई सामाजिक, सांस्कृतिक और अन्य संगठनों ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। संगठनों द्वारा फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाए जाने की मांग को लेकर बैठक, प्रदर्शन, नारेबाजी, जुलूस, पुतला दहन, ज्ञापन आदि के जरिए तीव्र प्रतिक्रिया जताई जा रही है।

इन संगठनों द्वारा रानी पद्मावती के चरित्र को गलत ढंग से प्रदर्शित किए गये दृश्यों को फिल्म से हटाने की मांग की जा रही है। साथ ही सिनेमाघरों के प्रबंधकों/मालिकों से इस फिल्म का प्रदर्शन न करने की अपील भी की जा रही है।

गृह विभाग ने अपने पत्र में यह जिक्र भी किया है कि पद्मावती फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने को लेकर कुछ संगठनों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी, जिसको अदालत द्वारा इस टिप्पणी के साथ नहीं सुना गया कि इसके लिए राहत का वैकल्पिक तरीका मौजूद है। अर्थात इस फिल्म के बारे में संबंधित पक्ष द्वारा सेंसर बोर्ड के समक्ष आपत्तियां उठाई जा सकती हैं।
गृह विभाग द्वारा पत्र के माध्यम से केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव को अवगत कराया गया है कि वर्तमान में प्रदेश में स्थानीय निकायों के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें 22, 26 और 29 नवंबर को 3 चरणों में मतदान होना है।

मतगणना की तिथि 1 दिसम्बर, 2017 है। 2 दिसम्बर, 2017 को ही चन्द्रदर्शन के अनुसार बारावफात का पर्व भी पड़ना संभावित है, जिसमें पारंपरिक रूप से मुस्लिम समुदाय द्वारा बड़े पैमाने पर जुलूस आदि निकाले जाते हैं।
गृह विभाग ने खत में कहा है, ‘ऐसे माहौल में यदि इस फिल्म को ट्रेलर लॉन्च के दौरान प्रदर्शित स्वरूप में सार्वजनिक रूप से रिलीज किया जाता है तो, इसके कारण प्रदेश में व्यापक पैमाने पर अशांति और कानून एवं व्यवस्था की स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। स्थानीय निकाय चुनाव और बारावफात को देखते हुए शासन-प्रशासन की व्यस्तताओं और प्रतिबद्धताओं के मद्देनजर 1 दिसम्बर, 2017 से फिल्म का रिलीज होना शांति व्यवस्था के हित में नहीं होगा।’ 


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