अंगद के पैर जैसा जमा है अपराधी अतीक का प्रभाव #KaushambiPolice के मनोबल पर. पहले सऊद ने चटाई धूल, अब फरहान हुआ फरार. केशवराज कलंकित


अभी योगी जी का दौरा उस जिले से ठीक से बीता भी नहीं था कि एक बार फिर कौशाम्बी पुलिस कर गयी अपना वो खेल जिसके लिए वो बदनाम है .. एक दुर्दांत अपराधी अतीक अहमद प्रभाव कौशाम्बी पुलिस के सर पर चढ़ कर बोल रहा है . भले ही वो सैकड़ों किलोमीटर दूर देवरिया की जेल में बैठा है लेकिन वो जो चाह रहा वही हो रहा कौशाम्बी में जबकि ये कौशाम्बी उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का गृहक्षेत्र है . जिस अतीक ने सबसे पहले अपने कुप्रभाव का असर दिखा कर एक महिला अधिकारी को आफिस में घुस कर धमकाने वाले अपने खासमखास सऊद अहमद को बिना किसी ठोस कार्यवाही के बचा लिया था अब उसी अतीक की धमक एक बार फिर से दिखी है जब उसके एक बेहद करीबी माने जाने वाले वाले फरहान ने पूरी कौशाम्बी पुलिस को बौना साबित कर दिया.. 

विदित हो कि सरकार बनने के बाद जो अपराधी अपने आपराधिक हरकतों के चलते योगी शासन की लिस्ट में पहले नम्बर पर आया था वो था इलाहाबाद और आस पास आतंक का पर्याय माने जाने वाला अतीक अहमद. अब उसी अतीक का बेहद खास साथी कौशम्बी पुलिस की गिरफ्त से निकल भागा है . अब तक ये निश्चित नहीं हो पाया है कि ये अपराधी आँख में धूल झोंक कर भागा है या आँखों में आँखें मिला कर. अब तक मिली जानकारी के अनुसार इस शातिर अपराधी को कौशाम्बी से इलाहाबाद पेशी पर लाया गया था। इसी दौरान यहां से भागने में सफल रहा। फरहान पर हत्या, अपहरण जैसे 7 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

इस मामले में सबसे हैरानी की बात ये है कि पुलिसकर्मियों ने लगभग 6 घंटे तक इस पूरे घटनाक्रम को छुपाए रखा , यदि पहले सूचना दी होती तो शायद स्थानीय पुलिस घेराबंदी आदि कर के इस अपराधी को गिरफ्तार करने का प्रयास करती लेकिन काफी देर बाद जब कंट्रोल रूम को सूचना दी गई तो फरहान की तलाश शुरू हुई। फिलहाल इस मामले में लापरवाही बरतने वाले हेड कांस्टेबल समेत चार सिपाहियों को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है लेकिन सवाल ये भी है कि यदि प्रतिशत मात्र भी इस पूरे मामले में कोई मिलीभगत है तो क्या वो मिलीभगत सिर्फ सिपाहियों तक होगी जबकि सामने उत्तर प्रदेश के सबसे कुख्यात माफियाओं में से एक से जुड़ा मामला है जो सीधे सत्ता के सर्वोच्च व्यक्ति को कई वीडियो में चुनौती देता दिख रहा है . कौशांबी पुलिस के अनुसार शुक्रवार को फरहान को इलाहाबाद की जिला अदालत की कोर्ट नंबर 10 और 14 में पेशी के लिए लाया गया था। शाम 4:45 बजे पेशी के बाद जब फरहान को पुलिस बाहर लेकर जाने लगी तभी वकीलों की वेशभूषा में आए कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और इसी बीच फरहान फरार हो गया।

यहाँ ध्यान देने योग्य ये भी है कि वकीलों के ऐसे ही घेरे ने कभी ३ साल से जेल में बंद सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह को भी कचेहरी में पीटना शुरू किया था जिसमे से एक नबी अहमद के ऊपर आधे दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज थे . फिलहाल इस मामले में पुलिसकर्मियों ने तत्काल कंट्रोल रूम को सूचना नही दी और खाली हाथ कौशांबी लौट गये , वरिष्ठ अधिकारीयों के अनुसार उन्हें तब इस मामले की जानकारी हुई जब फरहान को ले गयी गारद वापस खाली हाथ लौटी .. अभी जांच में ये भी साफ़ होना है कि इस गारद की ख़ामोशी खुद से थी या किसी के दबाव में .. घटना की जानकारी होते ही हड़कंप मचा तो तत्काल जांच के लिए कौशांबी की दूसरी पुलिस टीम को इलाहाबाद भेजा गया।  अब तक फरहान के भागने / भगाने का मुख्य दोषी मानते हुए कौशांबी के हेड कांस्टेबल भोला सिंह, सिपाही रामलाल, लवलेश और सुभाष को निलम्बित किया गया है जबकि ठीक से जांच में कुछ और भी बेपर्दा हो सकते हैं . 

जाँच के बाद परिणाम कुछ भी आयें लेकीन इतना तो तय हो चुका है कि केशवराज को उनके ही कर्मचारियों ने कलंकित कर दिया है.. उपमुख्यमंत्री के गृहक्षेत्र में ड्यूटी कर रहे पुलिस बल का सिपाही मात्र इतने बड़े दुस्साहस, लापरवाही या संभावित साजिश में शामिल होंगे इसमें यकीनन बड़ा संदेह है .. खौफ फैलाने वाले मोहम्मद सउद के बाद फरहान ने जिस प्रकार से कौशाम्बी पुलिस को धूल चटाई है उसके बाद यकीनन इतना तो कहा जा सकता है कि अतीक अहमद पर लगाम लगाने की योगी की तमाम कोशिशें बेकार हैं ..माना जा रहा है कि इसमें से कुछ अधिकारी इस बात से भी शशंकित है कि “अगर उसकी सरकार फिर आ गयी तो ” ….. 


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