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मायावती का पार्षद आया मज़हबी रंग में .. बोला- ” हिंदी नही उर्दू में लूंगा शपथ और कभी नहीं गाऊंगा वन्देमातरम”


चलो उन्हें हिन्दू से दिक्कत रही होगी , लेकिन क्या वो बता सकते हैं कि उन्हें राष्ट्रभाषा हिन्दी से क्या दिक्कत थी ?  वो न तो असमिया बोले जाने वाले असम से थे , न ही कन्नड़ बोले जाने वाले कर्नाटक से …वो थे 100% हिंदी भाषी उत्तर प्रदेश से , फिर उन्होंने हिंदी का अपमान क्यों किया ?

विदित हो कि बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जीत कर आये अलीगढ़ जिले के वार्ड संख्या 54 से  निर्वाचित पार्षद मुशर्रफ हुसैन महजर ने हिंदी में शपथ लेने से साफ साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह नगर निगम बोर्ड की बैठक शुरू होने से पहले वंदे मातरम गान में भी शामिल नहीं होंगे, क्योंकि संविधान में इसका कोई जिक्र नहीं है। मुशर्रफ हुसैन महजर ने नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा को पत्र लिखकर कहा है कि वह पार्षद पद की शपथ उर्दू में लेंगे। इसलिए उनका उर्दू भाषा में शपथ लेने का प्रबंध किया जाए।

शपथ से ही पहले उन्होंने वन्देमातरम का अपमान किया व हिंदी को तिरष्कृत किया .. आखिर क्या दिखाना चाह रहे थे वो ये कईयो की समझ से बाहर है ..साथ ही वो बहुजन समाज पार्टी के टिकट से जीत कर आये हैं जो मायावती जी द्वारा संचालित है ..वो मायावती जो भाजपा पर हिंदुत्व को बढ़ावा देने का आरोप लगाया करती हैं लेकिन स्वयं कभी अपनी पार्टी द्वारा पोषित ऐसी मज़हबी कट्टरता पर ध्यान नहीं देती और मौन रह कर उनको कहीं न कहीं मूक समर्थन देती रहती हैं … फिलहाल इस घटना ने UP में बढ़ावा दिए जा रहे मज़हबी उन्माद को दुनिया के आगे ले दिया है , साथ ही वोट के लिए राष्ट्रभाषा व राष्ट्रगीत का अपमान तक करवाने की एक कुत्सित सोच को भी दुनिया को दिखाया है … 


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