सिर्फ एक तहसील में अवैध पाए गये 57 मदरसे .. क्या हाल होगा जब जांच होगी पूरे प्रदेश और देश की

उत्तर प्रदेश के लिए इस से बड़ी सनसनी क्या हो सकती है की पिछली सरकारों में मदरसों को एक विधिवत सोची समझी प्लानिंग के तहत पहले तो बनाया गया फिर उन्हें भारी अनुदान दिए गये थे .. तुष्टिकरण की राजनीति और तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के के चलते जिस प्रकार से मदरसों को कमाने खाने के लिए प्रयोग किया गया वो हैरान कर देने वाला रहा . योगी शासन आने के बाद कम से कम जनता ने ये जानना शुरू किया है कि उनके खून पसीने की कमाई कहा और किस मद में प्रयोग या दुष्प्रयोग की जा रही थी .. सिर्फ एक तहसील के हालात जब इतने संवेदनशील मिले तो बाकी भारत में क्या हाल होगा ये सोचने का विषय है .

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश शासन के दिशा निर्देश पर मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा तहसील के मदरसों की जांच की गई तो बड़े बड़े अधिकारी भी हैरान रह गये . सिर्फ एक तहसील में ही 57 मदरसे मदरसा बोर्ड के मानक पर खरे नहीं उतरे। हालात ये रहे की खुद मदरसा संचालक जांच समिति के समक्ष दस्तावेज पेश नहीं कर सके जिसके बाद आख़िरकार मजबूर हो कर शासन ने उनकी मान्यता निरस्त करने की संस्तुति की गई है।

शासन से मिले दिशा निर्देश के बाद मुरादाबाद के जिलाधिकारी ने एसडीएम, खंड शिक्षा अधिकारी और जिला समाज कल्याण अधिकारी की संयुक्त समिति इस पूरे इलाके के मदरसों की जांच के लिए नियुक्त की थी। तीन सदस्य कमेटी ने मदरसों का स्थलीय निरीक्षण करने के साथ ही रजिस्टर्ड सोसायटी और भूमि संबंधी प्रपत्रों को चेक किया तो ज्यादातर मदरसा संचालक रिकार्ड नहीं पेश कर सके। कई मदरसे तो सिर्फ कागजों पर चलते मिले। उनमें बच्चे और अध्यापक भी नहीं थे।  पूरी जांच के बाद SDM ने 57 मदरसों की मान्यता निरस्त करने की संस्तुति कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी गई है। 

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