क्या मजबूरी में हुआ बुआ मायावती व भतीजे अखिलेश का मिलन रोक पायेगा गोरखपुर तथा फूलपुर में भाजपा के विजय रथ को….जानिए…..

देश की राजनीति में इस जैसे घबराहट का महल है. एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की राजनैतिक नीतियों के दम पर भारतीय जनता का विजय रथ पूरे देश में अश्वमेध के घोड़े की तरह दौड़ रहा है वहीं इस कारण अन्य राजनैतिक पार्टियों को अपने वजूद के मिटने का खतरा भी दिखाई दे रहा है. देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस तथा वामदल तो जैसे मिटने के कगार पर आ गये हैं वहीं कई क्षेत्रीय पार्टियाँ भी बीजेपी से डरी हुईं प्रतीत हो रही हैं तभी तो बीजेपी के खिलाफ एक होने की कोशिश की जा रही है.

उत्तर प्रदेश की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियाँ सपा था बसपा का हाल भी कुछ ऐसा ही है. 2014 के चुनावों से पहले यूपी राजनीति की धुरी सपा तथा बसपा के इर्द गिर्द ही घूमती थी तथा राज्य में भाजपा तीसरे व चौथे स्थान की लड़ाई लडती थी. लेकिन अब समय बदल गया है तथा बीजेपी ने यूपी पर एक तरह से कब्जा जमा लिया है. वहीं सपा बसपा सिमट चुकी है. आज लोकसभा में जहाँ बसपा का कोई सांसद नही है वही सपा के सिर्फ सांसद हैं. विधानसभा में भी बसपा के सिर्फ 19 तथा सपा के 47 विधायक हैं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के अपनी अपनी लोकसभा सीट गोरखपुर तथा फूलपुर से इस्तीफ़ा देने के बाद इन सीटों पर उपचुनाव हो रहा है. २०१७ तक एक दुसरे की कट्टर दुश्मन रहीं सपा व बसपा ने इन उपचुनावों में भाजपा को हराने के लिए हाथ मिला लिया है. कोई नहीं सोच सकता था कि सपा व बसपा का कभी गठबंधन भी हो सकता है. लेकिन इसे मजबूरी कहें या वजूद मिटने का खतरा, आज दोनों दुश्मन सिर्फ भाजपा को हराने के लिए साथ आये हैं वहीं भाजपा ने भी अपनी सीट बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी है. लेकिन इसके बाद सवाल है कि सपा बसपा गठबंधन करने के बाद भाजपा को फूलपुर ठा गोरखपुर लोकसभा सीट जीतने से रोक पाएंगी?

अगर 2014 के लोकसभा चुनावों की बात करें तो अगर आज उस प्रकार से भी वोटिंग होती है तो भी वहां भाजपा को रोकना मुश्किल लग रहा है….अब बात करते हैं फूलपुर लोकसभा सीट की. 2014 में फूलपुर लोकसभा सीट पर भाजपा के केशव प्रसाद मौर्य को  कुल पड़े  9 लाख 60 हजार 341 मतों में से 5 लाख 3 हजार 564 वोट मिले थे. एसपी उम्मीदवार धर्म सिंह पटेल को 1 लाख 95 हजार 256 वोट, बीएसपी प्रत्याशी कपिलमुनि करवरिया को 1 लाख 63 हजार 710 और कांग्रेस के मो. कैफ को 58 हजार 127 मत मिले थे. बीजेपी को यहां 52 फीसदी वोट मिले थे, जबकि एसपी और बीएसपी का वोट फीसदी 47 रहा.
ऐसे में सपा-बसपा ही नहीं बल्कि विरोध में पड़े सभी मतों को मिला दें तो भी वो बीजेपी को मिले वोट के मुकाबले कम था. इसी रिकॉर्ड को देखते हुए कहा जा सकता है कि अगर 2014 जैसे वोट पड़े तो भी फूलपुर से भाजपा की जीत सुनिश्चित है.

अब बाबत करते हैं गोरखपुर लोकसभा सीट की…2014 में गोरखपुर लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी योगी आदित्यनाथ को 5 लाख 39 हजार 127 वोट मिले थे. सपा उम्मीदवार राजमति निषाद को 2 लाख 26 हजार 344 वोट मिले, वहीं बसपा प्रत्याशी राम भुअल निषाद को 1 लाख 76 हजार 412 वोट मिले थे. इसके अलावा कांग्रेस को महज 45 हजार 719 वोट मिले. इस तरह सपा और बसपा के साथ-साथ कांग्रेस के वोट को मिला दें तो 4 लाख 48 हजार 475 वोट होते हैं. जो कि बीजेपी से 90 हजार 652 वोट कम हैं.

अब जबकि उपचुनावों में कांग्रेस अलग चुनाव लड़ रही है तो अगर 2014 के चुनावों के आधार देखा जाये तो मायावती व अखिलेश यादव का ये मजबूरी का मिलन भी भारतीय जनता पार्टी को इन उपचुनावों में विजयश्री हासिल करने से नहीं रोक पायेगा.

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