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मध्य प्रदेश में विधर्म को बर्दाश्त नहीं कर सकता हिन्दू… सतना में हिन्दू दलों का भारी विरोध, दुबक गए धर्मान्तरण वाले

मध्यप्रदेश वर्ष 1968 में धर्म परिवर्तन पर कानून बनाने वाला उड़ीसा के बाद देश का दूसरा राज्य बना.वर्ष 2013 में कानून में संशोधन किया गया जिसके तहत धर्मांतरण से पहले राज्य सरकार से मंजूरी लेना अनिवार्य किया गया और जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर सजा का प्रावधान रखा गया. देश में अगर कोई सरकारी रिकॉर्ड में अपना नाम या नाम की स्पेलिंग भी बदलना चाहे तो उसे एक तय प्रक्रिया का पालन करना होता है.इसके लिए उस व्यक्ति को एसडीएम को हलफनामा देना होता है कि वो ऐसा पूरी तरह से होशो-हवास में कर रहा है।

साथ ही अखबार में सूचना भी छपवानी होती है. ठीक इसी तरह वैवाहिक स्थिति में किसी बदलाव, तलाक, संबंध, संबंध विच्छेद और पावर ऑफ अटॉर्नी वगैरह में भी हलफनामा देकर पूरी प्रक्रिया निभानी पड़ती है.लेकिन धर्म बदलना इतना आसान है कि पांच मिनट के अंदर किसी को भी हिंदू से मुसलमान या ईसाई बनाया जा सकता है.ईसाई मिशनरी और इस्लामी मदरसे इसी का फायदा उठाते है.दबाव या लालच ही नहीं, आजकल तो डरा-धमकाकर भी धर्म परिवर्तन के कई मामले सामने आ रहे है.मध्य प्रदेश के सतना जिले में धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए कथित तौर पर हिंदूवादी संगठन से जुड़े युवाओं ने गुरुवार की रात को क्रिससम की तैयारियों में जुटे इसाई समुदाय के लोगों पर हमला बोल दिया.युवकों ने उनसे मारपीट की और उनकी कार को भी आग के हवाले कर दिया.

वर्गीस ने बताया कि कुछ उत्पाती तत्व धर्मांतरण की बात कह रहे थे जबकि ऐसा कुछ नहीं था, क्रिसमस की तैयारी चल रही थी.धर्मांतरण का आरोप बेवजह लगाया गया है। वहीं, नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) डी डी पांडे ने सूत्रों को बताया कि धर्मेंद्र दोहड़ ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका धर्मांतरण करने के लिए पांच हजार रुपये दिए गए.तालाब में स्नान कराया गया.साथ ही उसका नाम बदलकर धर्मेंद्र थॉमस किया और कहा गया कि अब ईशु की पूजा करना.पांडे के मुताबिक, धर्मेंद्र की शिकायत पर पुलिस ने एक ज्ञात और पांच अज्ञात लोगों के खिलाफ प्रलोभन आदि देने पर भारतीय दंड विधान की धारा 153 (ख), 11 (द) और 295 (क) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है.

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