पहले से मिल रहे थे इनपुट कि गौ हत्या के बहाने बिगाड़े जा सकते हैं हालात, लेकिन बुलंदशहर प्रशासन व्यस्त था इज्तिमा के आयोजन में

उनकी जिम्मेदारी सिर्फ एक स्थान विशेष की नहीं बल्कि पूरे जिले की स्थिति सामान्य रखने की थी .. उन्होंने अपना पूरा ध्यान सिर्फ एक स्थान पर केंद्रित कर रखा था . बाकी जगहों पर क्या चल रहा है इस से अगर प्रशासन को बेहतर सरोकार होता तो इंस्पेक्टर सुबोध आज शायद जीवित होते और साथ मे जीवित होता सुमित नाम का वो व्यक्ति जो गौ हत्या की शिकायत करने पहुचा था पुलिस के पास और आखिरकार लौटा 4 कंधों पर .. यकीनन भारी चूक और अनदेखी का प्रतिफल है बुलंदशहर में हुआ उत्पात जहां बुलंदशहर की जनता को बाहर निकलने तक और सामान्य कार्य करने तक मे हो रही थी असुविधा ..

विदित हो कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम उत्तर प्रदेश में गौहत्या की दुस्साहसिक घटनाएं एक पूरे क्षेत्र का माहौल बिगाड़ सकती हैं , ऐसी जानकारी पहले से ही थी लेकिन इस से बेखबर रहा बुलंदशहर का प्रशासन ..गौकशी की वारदात कभी भी माहौल को बिगाड़ सकती हैं। यहां गोकशी की वारदात के बाद सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन जाती है। इस से पहले भी पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर और बागपत में माहौल खराब करने की साजिश भी हो चुकी है। लेकिन बुलंदशहर का प्रशासन इस पर ध्यान नही दिया और पूरा ध्यान केवल एक ही क्षेत्र की आवभगत में लगाया .

मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर समेत कई जिलों में गोकशी पर हिंदू संगठन और दूसरे समुदाय के लोग आमने सामने आए। कई बार स्थिति ऐसी बनी कि गोकशी को लेकर पथराव, वाहनों में तोड़फोड़ व आगजनी की घटना हो चुकी है।

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