UP का मेरठ ज़ोन बना पुलिसकर्मियों की कब्रगाह.. कोई मार रहा खुद को गोली तो कोई खा रहा जहर

इतने व्यापक स्तर पर आत्महत्या या उसके प्रयास केवल एक ही ज़ोन में कैसे और क्यों ? ये वो ज़ोन है जहाँ पिछले कुछ समय से पुलिस और अपराधियों की सबसे ज्यादा मुठभेड़ हुई है लेकिन इसी ज़ोन में अब पुलिस वाले क्यों सरेंडर कर रहे हैं मौत के आगे खुद से ही ? अगर इतने बड़े स्तर पर अपराधी मरे होते तो यकीनन अब तक तमाम तन्त्र बोल पड़े होते लेकिन जब लाश खाकी वर्दी वाले की होती है तो ख़ामोशी उन्हें अपना परम कर्तव्य समझ में आता है . क्या वजह है इसको कब जाना जाएगा ?

ट्रांसफर, निलम्बन आदि एक अराजपत्रित पुलिस वाले की दिनचर्या में गिना जाता है .. अगर एक बार सीमा के उस पार दिल्ली पुलिस के पोस्टेड थानेदारों के बोर्ड पढ़ कर कोई आएगा तो एक थानेदार एक थाने में उतना समय बिताता है जितना उत्तर प्रदेश में  ज्यादातर मंत्री अपने मंत्रालय में नहीं रह पाता .. दिल्ली में किसी की पोस्टिंग 2 साल तो किसी की लगभग 3 साल आम बात है लेकिन उत्तर प्रदेश में एक जगह पर 3 महीने भी बिताने 3 जन्म के बराबर हैं, फिर भी UP पुलिस स्टाफ खुद को उसके लिए तैयार रखा है .

लेकिन इतने के बाद भी UP पुलिस का स्टाफ हर आदेश का पालन कर के खुद को कभी इस थाने से उस थाने , इस जिले से उस जिले और कभी कभी इस रेंज से उस रेंज तक जाने के लिए तैयार रहता है और ज्यादा से ज्यादा अपनी अधिकतम पहुच का इस्तेमाल कर के उसको टालने की कोशिश करता है और अंत में हर कोशिश विफल होने पर वो नये गन्तव्य की तरफ रवाना हो जाता है . पर आत्महत्या वो अंतिम चरण है जो पुलिस वाला ही नही कोई सामने व्यक्ति भी अपनाता है ..

आखिर मेरठ ज़ोन के तमाम पुलिस वालों को ऐसी कौन सी हालत में ला दिया गया है जो उन्हें आत्महत्या ही अंतिम विकल्प के रूप में दिखाई दे रही है . किसी विभाग में कई चरण होते हैं जिसमे एक चरण पर सुनवाई न होने के बाद कोई दूसरे और तीसरे से ले कर अंतिम चरण तक जाता है लेकिन क्या यहाँ पर कोई चरण ही नहीं बचा है और एक पुलिसवाले को अपनी तमाम समस्याओ का एकमात्र इलाज मौत ही दिखाई दे रही है ? जबकि वो जानता है कि उसकी मौत के साथ उसकी पत्नी विधवा, माता पिता बेसहरा और बच्चे अनाथ हो जायेगे..

पिछले 24 घंटे में ही मेरठ ज़ोन में पहले बिजनौर जिले की कलेक्ट्रेट ड्यूटी में तैनात सिपाही अंकित राणा ने खुद की ही रायफल से खुद को ही गोली से उड़ा लिया .. सिपाही अंकित राणा बागपत का रहने वाला था..यद्दपि ये घटना बरेली ज़ोन की ही कही जायेगी क्योकि बिजनौर बरेली ज़ोन में आता है. इसके बाद आई एक अन्य खबर में गाजियाबाद के कवि नगर क्षेत्र में एक सब इंस्पेक्टर मधुप ने खुद से खुद को गोली मार ली.. सब इंस्पेक्टर मधुप बिजनौर के थाना बलेरी में SSI पद पर तैनात थे .. इस से पहले सहारनपुर में एक सब इंस्पेक्टर फांसी झूल गया था अपनी आडियो वायरल करने के बाद .

जनपद मुज़फ्फरनगर में जिस प्रकार से एक महिला पुलिसकर्मी ने आत्महत्या का प्रयास किया है और बाकी अन्य महिला पुलिसकर्मियों को उसी से जुडी कार्यवाही की आड़ में प्रताड़ित किया जा रहा है वो आने वाले समय में ऐसी कई घटनाओं की नींव को भर रहा है . निश्चित तौर पर खुद को पाक साफ़ साबित करने के लिए जिस प्रकार से अधिनस्थों के पहले तो कैरियर और अब जीवन से खिलवाड़ हो रहा है वो एक भयावह हालात को जन्म दे रहा है और हर हाल में अब रुकना चाहिए..

इतना ही नहीं मुज़फ्फरनगर में एक महिला सब इन्स्पेटर अभी भी जिन्दगी और मौत से जूझ रही जिसने विभागीय तनाव के चलते जहर खा रखा है जहां के SSP का पुलिसिया इतिहस आगरा और उस से पहले जानना जरूरी है.. अब तक सामने आये इन सभी मामलों में मुख्य वजह है मानसिक तनाव .. इस तनाव की असल वजह क्या है और एक ही क्षेत्र में क्यों है इसकी पूरी पड़ताल जल्द ही सुदर्शन न्यूज सबके सामने लाएगा .. पुलिस समाज की सुरक्षा की रीढ़ है लेकिन उस रीढ़ का इस प्रकार से दरकना किसी भी प्रकार से शुभ संकेत नहीं है इसलिए इसका सच सामने आना जरूरी है .

 

रिपोर्ट –

राहुल पाण्डेय 

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज 

मुख्यालय नोएडा 

मोबाइल – 09598805228

 

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