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“दंगा इसलिए हुआ क्योंकि हिन्दू खेलते थे वालीबाल”.. एक ऐसा प्रदेश जिसने हिन्दुओ के खेलने पर ही लगा दिया प्रतिबन्ध, वहां सेकुलर सरकार है

बहुत आशाओं से सबने मिल कर एक नयी सरकार को बहुमत दिया था और आशा की थी कि आने वाले समय में उन्हें उन तमाम समस्याओं से मुक्ति मिलेगी जो वो काफी समय से झेल रहे हैं . इसके चलते ही उन्होंने अपनी सरकार तक बदली और अपना मुख्यमंत्री तक बदला .. लेकिन अब उन्हें झेलने पड़ रहे हैं ऐसे ऐसे आदेश जो उन्होंने शायद ही इस से पहले झेले तो दूर सुने भी रहे होंगे . कौन कब कितनी देर और कहाँ खेलेगा ये अब सरकार निर्धारित करेगी .

ज्ञात हो कि ये मामला है राजस्थान का जहाँ पर कांग्रेस पार्टी ने पूर्ण बहुमत से अपनी सरकार बनाई है . यहाँ पर गहलोत सरकार ने तमाम वादे और दावे किये थे लोगों से लेकिन अब उन दावों के पीछे से निकल कर आ रहा ऐसा सच जो उन्होंने सोचा भी नहीं था . ये मामला शुरू हुआ था जोधपुर के मुस्लिम बहुल इलाके बकरमंडी से .. यहाँ पर एक प्राचीन भगवान गणेश जी का मन्दिर है जिसके पास वहां के हिन्दू समुदाय के कुछ लड़के रात में वालीबाल खेलते थे .

इस बीच इनको वहां पर खेलने से मना करते हुए कुछ लोगों ने धमकाया भी था पर खेलना कोई गुनाह नहीं है ये कहते हुए वो लड़के अपने खेल को जारी रखे थे . एक दिन अचानक ही भयानक अंदाज़ में उन लड़कों पर पत्थरबाजी की गयी और उसमे से कुछ चोटिल हो गये . ये पत्थरबाजी एक वर्ग विशेष द्वारा जानबूझ कर की गयी थी . इसकी जानकारी जब खेल रहे युवको के परिवार वालों को हुई तो वो घटनास्थल की तरफ दौड़े अपने परिजन की चिंता में .

घायलों के परिजनों को आता देख कर मजहबी उन्मादियो ने उनके ऊपर भी पत्थरबाजी कर दी और देखते ही देखते माहौल साम्प्रदायिक तनाव से गर्म हो गया . दोनों पक्ष लामबंद हो गये और मौके की नजाकत देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया . इस मामले का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमे एक पक्ष दूसरे पक्ष के लड़के की बुरी तरह से पिटाई कर रहा है . इस मामले में पीड़ित पक्ष को पुलिस से न्याय की आशा थी लेकिन कांग्रेस शासित प्रदेश के पुलिस बल ने खेलने वाले लडको को ही प्रथमदृष्टया दोषी माना और उनकी तुलना पत्थर मारने वाले उनम्दियो से लगभग बराबरी में कर दी ..

पुलिस ने पत्थरबाजो के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने के बजाय मुस्लिम पक्ष के मौलाना आदि को बुलाया जिन्होंने मांग रखी कि उस इलाके में युवको को रात में खेलने से मना किया जाय . पुलिस ने फ़ौरन ही उन मुस्लिम प्रतिनिधियों की बात को मान लिया और साफ़ साफ़ आदेश जारी कर दिया कि अब उधर कोई भी रात में नहीं खेलेगा . और जो खेलेगा उसको कानूनी रूप से दंडित किया जाएगा . पुलिस का ये आदेश अभी तक किसी के गले नहीं उतर रहा है और सवाल किया जा रहा है कि क्या साम्प्रदायिक उन्माद आदि रोकने के लिए खेल रोकना जरूरी है जबकि पाकिस्तान आदि से तनाव कम करने के लिए यही बुद्धिजीवी वर्ग खेलने आदि की दुहाई देता है .

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