ममता बनर्जी ने सोचा था कि इस कदम से उनकी जबर्दस्त वाह वाही होगी, लेकिन इमाम ने दिखाया उन्हें आईना तथा कहा- “पहले इबादत”

हिन्दुस्तान में मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति का सबसे बड़ा नाम बन चुकी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री तथा तृणमूल कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने सोचा था कि अगर वह इमाम को पुरस्कार देंगी तो इससे मुस्लिम समुदाय खुश होगा तथा उनका मुस्लिम वोट बैंक बड़ा होगा. लेकिन इमाम ने ममता बनर्जी ने पुरस्कार को लेने से साफ़ कर दिया तथा कहा कि उसके लिए इबादत पहले है, मुख्यमंत्री का पुरस्कार नहीं. इमाम द्वारा ममता बनर्जी के पुरस्कार को न लेना उनकी राजनीति को आईना दिखाना है.

बता दें कि ममता बनर्जी जिस इमाम को पुरस्कार दे रही थीं, ये वही इमाम हैं जिनका बेटा श्रीराम नवमी पर पश्चिम बंगाल में हुए साम्प्रदायिक दंगों में आसनसोल में मारा गया. जिसके बाद इमाम ने शन्ति की अपील की थी व् इमाम को हीरो बना दिया था. हालाँकि सुदर्शन ने इमाम तथा उसके बेटे की वास्तविकता को सामने ला दिया था. चूँकि इमाम ने दंगों के दौरान शांति की अपील की थी जिसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से उन्हें बंगा भूश्ना पुरस्कार देने की घोषणा की गयी थी तथा इमाम को आमंत्रित किया गया था, हालाँकि इमाम इस पुरस्कार को लेने कोलकाता नहीं पहुंचे.

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से “बंगा भूषण पुरस्कार” न लेने के कारण को मौलाना इम्दादुल्ला राशिदी ने अपनी इबादत को बताया. मौलाना इम्दादुल्ला राशिदी ने कहा कि वह रमजान के पवित्र और धन्य महीने में कोलकाता की यात्रा करने में असमर्थ हैं. मौलाना ने कहा कि रमजान इबादत का महीना है और वह इस महीने में इबादत के अलावा अन्य किसी गतिविधि में शामिल नहीं हो सकते. इसलिए वह बंगाल सरकार की ओर से पुरस्कार लेने नहीं जा रहे हैं.

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