स्वामी विवेकानंद जी की मूर्ति तोड़कर क्या संदेश दिया जा रहा एक वर्ग को ? कितना जहर भरा है कट्टरपंथ में ?

सभी को याद होगा कि त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद विदेशी वामपंथी नेता लेनिन की मूर्ति गिरा दी गयी थी तो इससे केवल त्रिपुरा नहीं बल्कि देशभर की राजनीति में भूचाल आ गया था. विदेशी नेता लेनिन की मूर्ति गिराए जाने पर क्या राजनेता और क्या तथाकथित बुद्द्धिजीवी सड़क से संसद तक हंगामा किये थे तथा कहा गया था कि देश में अघोषित इमरजेंसी लग गयी है. लेकिन अब हिंदुत्व के महानतम पुरोधा तथा हिंदुस्तान के युवाओं की प्रेरणा स्वामी विवेकानंद जी की मूर्ति तोड़ी गयी है तो लेनिन की मूर्ति पर चीखने वाले मौन साध गये हैं.

जी हाँ, स्वामी विवेकानंद जी की मूर्ति उन्मादियों द्वारा तोड़ी गयी है तथा ममता बनर्जी शाशित पश्चिम बंगाल में तोड़ी गयी है. खबर के मुताबिक़, पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्वामी विवेकानंद की मूर्ति को उन्मादी तत्वों द्वारा छतिग्रस्त किया गया है. सूरी के स्थानीय लोगों ने गुरुवार को मोहम्मद बाजार में स्वामी विवेकानंद की मूर्ति को क्षतिग्रस्त देखा जिसके बाद तत्काल पुलिस को इसकी सूचना दी.  आपको बता दें कि स्वामी विवेकानंद की ये मूर्ति दस फुट ऊंचे प्लेटफॉर्म पर लगी है. एक स्थानीय क्लब की ओर से इस मूर्ति का अनावरण जनवरी 2015 में किया गया था. उन्मादियों ने स्वामी विवेकानंद जी की मूर्ति की नाक और उंगलियां तोड़ने के साथ सिर पर बड़ा पत्थर रख दिया. 

जिस स्थानीय क्लब ने स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा को स्थापित किया था उसके सदस्य विद्युत मोंडोल ने कहा, ‘जिन्होंने भी ये किया है वो स्वामी विवेकानंद के बारे में नहीं जानते. हमें इस क्षेत्र में स्वामी जी के बारे में जागरूकता लाने की जरूरत है जिससे कि भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हों.’ निश्चित रूप से ये बेहद शर्मनाक है कि जिन स्वामी विवेकानंद जी ने दुनियाभर में भारतीय संस्कृति का डंका बजाया तथा तथा भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाया, लेकिन वो कौनसी सोच है जो हिंदुस्तान की सबसे बड़ी प्रेरणा स्वामी विवेकानंद जी की मूर्ति को स्वीकार नहीं कर पाती तथा उसे तोड़ देती है? आखिर ये कट्टरपंथ का जहर देश को किस दिशा में लेकर जा रहा है.

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