सिर्फ 3 साल की बच्ची थी वो जिस पर जरा भी दया नहीं खाया 45 साल का मुन्ना शेख..कैसे माना जाये कि वो एक इंसान है

आखिर वो कौन लोग हैं जिन्हें रिश्तों की मानवता की कोई परवाह नहीं होती है? आखिर ऐसी सोच कहाँ से पनपती है जो अपनी उम्र का भी लिहाज नहीं करती अपनी पोती समान बच्ची के बचपन को भी अपनी हवस के पैरों तले रौंद देती है? समझ नहीं आता कि ऐसी दुराचारी मानसिकता के लोगों को इंसान कहें भी या न कहें.

ताजा मामला पश्चिम बंगाल के कोलकाता से जुड़ा हुआ है जहाँ 45 वर्षीय मुन्ना शेख नामक व्यक्ति ने एक तीन साल की बच्ची का दुराचार करके उसे लहूलुहान कर दिया. कोलकाता के कनाल रोड पर एक विधवा की 3 वर्षीय बेटी अपने 5 साल के भाई के साथ खेल रही थी. तभी वहां बीएस क्लीनर मुन्ना शेख आया तथा चोकलेट देने के बहाने बच्ची को बीएस में ले गया तथा दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया व बच्ची के साथ बड़ी बेरहमी के साथ दुराचार किया.

अंदर बच्ची चीखती रही चिल्लाती रही लेकिन लेकिन दुराचारी शेख को उस पर जरा भी दायाँ आयी. बहिन के रोने की आवाज सुनकर भाई दौड़कर घर गया तथा अपनी आन को सूचना दी. बच्ची की माँ ने पड़ोसियों को इसके बारे में बताया तब पड़ोसी लोग भागकर बस के पास पहुंचे तब जाकर मुन्ना शेख ने दरवाजा खोला. अन्दर देखा तो बच्ची खून से लथपथ बेसुध पडी थी. बच्ची की इस हालत को देखकर लोगों ने मुन्ना शेख की पिटाई की तथा पुलिस बुलाकर उसके सुपुर्द कर दिया.

पुलिस का कहना है कि बच्ची का मेडिकल कराया गया है लेकिन हालात देखकर लग रहा है कि बच्ची के साथ बर्बरता की गयी है. लेकिन हम मेडिकल रिपोर्ट का इन्तजार कर रहे हैं तथा आरोपी मुन्ना शेख से भी पूंछताछ कर रहे है.

इस घटना के बाद कोलकाता की कानून व्यवस्था की वास्तविकता सामने आ गयी है जहाँ 3 साल की बच्चियां तक सुरक्षित नहीं हैं. जिस बच्ची के साथ बर्बरता की गयी है उसको तो अभी ठीक से सही गलत का ज्ञान तक नहीं है. आखिर इन दरिंदों पर कड़ी कार्यवाही क्यों होती जिससे भविष्य में ऐसी घटनाये न घटित हों. आखिर शासन व प्रशासन कब तक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेगा तथा ये मासूम बच्चियां मुन्ना शेख जैसे मानवता के हत्यारों की हवस की भेंट चढ़ती रहेंगी?

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