खामोशी है अब जब तोडी गयी भारत में जन्मे और भारत के लिए बलिदान हुए मुखर्जी की प्रतिमा…वामपंथ का ये भी एक स्वरूप

त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ती तोड़े जाने के बाद वामपंथी लोग तथा छद्म धर्मनिरपेक्षता वाले लोगों का विधवा विलाप शुरू हो गया था. लेनिन जिसका हिंदुस्तान से कोई नाता नहीं रहा, ना भारत ना भारतीयता से लेनिन का कोई नाता रहा है और जब त्रिपुरा में लेनिन की मूर्ती गिराई गयी तो इन लोगों ने बबाल मचा दिया लेकिन अब कोलकाता में हिंदुस्तान की एकता के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने वाले महात्मा डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा तोड़ दी गयी है तब ये वामपंथी लोग मौन साधे बैठे हैं.

श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने एक देश एक कानून एक ध्वज की मांग को लेकर अपने प्राणों का बकिदान दे दिया लेकिन इन वामपंथियों ने उन मुखर्जी की प्रतिमा को तोड़ दिया है. अफ़सोस की बात तो ये है कि जो लोग लेनिन की मूर्ती तोड़े जाने पर बिलबिला रहे थे अब मुखर्जी की प्रतिमा तोड़े जाने पर उनका मुंह नहीं खुल पा रहा है. वामपंथ का असली स्वरूप यही है. इनके आदर्श लेनिन हो सकते हैं लेकिन देश के लिए जान देने वाले मुखर्जी नहीं. इनके आदर्श माओ हो सकते हैं, इनके आदर्श स्टॅलिन हो सकते हैं लेकिन मुखर्जी नहीं.

खबर के मुताबिक टॉलीगंज स्थित केवाईसी पार्क में लगी श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मूर्ति को निशाना बनाया गया. मुखर्जी की मूर्ती न सिर्फ तोडी गयी बल्कि उनकी मूर्ती पर कालिख भी पोती गयी. निश्चित रूप से ये वामपंथ की खीज निकल रही है क्योंकि देश की जनता ने वामपंथ का एक तरह से सफाया कर दिया है. इसी सोच के कारण त्रिपुरा से वामपंथ का सफाया हुआ व आज सिर्फ केरल में वामपंथी सरकार है. आज जिस तरह से देश के अमर बलिदानी श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा को वामपंथियों ने तोड़ा है तो इसका स्पष्ट संकेत है कि आने वाले समय में देश से वामपंथ विचारधारा ही समाप्त हो जायेगी. ये हिंदुस्तान देश के नायक का अपमान कभी स्वीकार नहीं करेगा.

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