हाईकोर्ट तक ने माना कि वो गलत है, पर शायद UP पुलिस नहीं.. “गाजियाबाद में अपराधी आबाद ही नहीं आजाद और जिंदाबाद भी”

कुछ समय पहले आप ने “जिला गाजियाबाद” फिल्म देखी होगी . यद्दपि हम उस फिल्म में दिखाए गये गाजियाबाद के स्वरूप को सही नहीं मानते हैं और ये मानते हैं कि गाजियाबाद में सभ्य और शांत लोग रहते हैं लेकिन उन्ही के बीच में कुछ गिने चुने ऐसे भी हैं जो इन सभ्य और शांत लोगों की शांति में बाधा डाला करते हैं, ठीक उसी अंदाज़ में जैसे कभी रामायण काल में ऋषि मुनियो के हवन आदि में दानव आदि डाला करते थे.. आज उस विघ्न का कारण कोई और नहीं बल्कि खुद वहां के रक्षको का रवैया है ..

क्या आप कल्पना कर सकते हैं एक ऐसे संदिग्ध या वांछित की जिसके ऊपर आधे दर्जन के आस पास मुकदमे हों और उसके बाद भी वो अधिकारियो के साथ अपनी फोटो पोस्ट करते हुए सोशल मीडिया पर लाइव दिखाई दे.. वो तमाम जाली प्रमाण पत्रों से अपना वो पासपोर्ट बनवा ले जो किसी राष्ट्र की पहिचान का सबसे उच्चतम पहिचान पत्र माना जाता है .. इसके बाद भी पुलिस के हाथ उसके बगल तक जाने में किसी भय या दबाव के चलते काँप रहे हों तो सवाल बनेगा कि क्या जिला सुरक्षित है ?

एक अभियुक्ता जिसके खिलाफ पहले जिला अदालत ने आदेश जारी किया और अब हाईकोर्ट में भी उसको सरेंडर करने का निर्देश दिया है , क्या वो उत्तर प्रदेश पुलिस की दृष्टि में सही और क्लीन चिट में है ? ध्यान देने योग्य है कि उच्च न्यायलय ने ठगी के साथ कई अन्य मामलो में वांछित एक महिला को आत्म समर्पण के आदेश दिए हैं.. इस महिला को उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद पुलिस से पूरा समय मिला बाकायदा अपना पक्ष मजबूत करने के लिए और बचाव के हर साधन तलाशने के लिए ..

उक्त महिला साहिबाबाद क्षेत्र की रहने वाली बताई जाती है जो सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक के खिलाफ संवेदनहीन और असभ्य लाइने लिखने के लिए चर्चा में रही है . जब एक लम्बे समय से गाजियाबाद पुलिस इसके ऊपर हाथ नहीं डाल पाई तब इसने इसको अपने लिए हरी झंडी समझते हुए उच्च न्यायालय से अपने खिलाफ चल रहे फर्जीवाड़े के केस को समाप्त करने की अर्जी दी .. लेकिन न्यायलय ने इसको आत्मसमर्पण के आदेश दिए ..

इसी महिला के खिलाफ कुछ समय पहले स्थानीय अदालत के आदेश भी चर्चा में थे जिसको पूरे भारत ने पढ़ा और सुना , केवल स्थानीय पुलिस को छोड़ कर.. आधे दर्जन के आस पास मुकदमे में वांछित ये महिला लगातार सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही है जिसकी लोकेशन आदि की जानकारी फिर भी पुलिस को नहीं , इसमें हर किसी को शक है.. कैसे माना जाय कि आधे दर्जन मुकदमे में वांछित कोई अभियुक्ता हर दिन सोशल मीडिया पर लाइव आ रही या पोस्ट कर रही , फिर भी पुलिस को उसकी लोकेशन नहीं पता .. अगर इतने के बाद भी वो ये नहीं पता कर सकती तो क्या उस से समाज की रक्षा की आशा की जा सकती है अगर कोई अपराधी इस अभियुक्ता से भी ज्यादा शातिर निकल आये तो ?

बताया ये जा रहा है कि हाईकोर्ट से ये आदेश पाने के बाद महिला ने एक बार फिर से अपने लिए अति सुरक्षित जिला “गाजियाबाद” की तरफ प्रस्थान किया है जहाँ की पुलिस पर उसको पूरा विश्वास है कि वो आगे भी उस से वैसे ही फासला बना कर रखेगी जैसे तब तक बनाए हुए है.. आशा ये भी जताई जा रही है कि वो गाजियाबाद पहुच कर एक बार फिर से अपने सोशल मीडिया हैंडलो पर सक्रिय होगी और तमाम पोस्ट आदि कर के ये साबित करेगी कि वो अपने सुरक्षित स्थान पर पहुच चुकी है जहाँ कानून के हाथ भी उस तक नहीं पहुच सकते …

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