क्या विभाजन की तरफ बढाया जा रहा दिल्ली को ? अगर यही फैसला हिन्दू बच्चों के लिए होता तो ?

खबर पढने से पहले एक बार कल्पना कीजिये कि यदि कोई सरकार कई स्कूलों को ऐसे खोलने की घोषणा करे जिसमे हिन्दू बच्चो को पढ़ाई के लिए विशेष गुणवत्ता दी जायेगी और वो स्कूल विशेष तौर पर हिन्दू बच्चो के लिए होगा .. अब आप इस कल्पित खबर पर सेकुलरिज्म के तमाम तथाकथित ठेकेदारों के बयानों की कल्पना कीजिये .. ख़ास तौर पर अरविन्द केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी के स्टैंड के बारे में.. लेकिन जब हालात इसके उलट हों तो वो फिट कर दिया जाता है सेकुलरिज्म के खांचे में .

ध्यान देने योग्य है कि दिल्ली वक्फ बोर्ड ने मुसलमानों के बच्चो को विशेष रूप से बेहतर शिक्षा दिलाने के नाम पर अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को खोलने का फैसला किया है। दिल्ली वक्फ बोर्ड के बड़े पधाधिकारियो के अनुसार चल रहे शैक्षणिक सत्र में मटिया महल, बल्लीमारान, ओखला, निजामुद्दीन, सीलमपुर और मुस्तफाबाद जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में कक्षा आठ तक के सोलह स्कूल खोले जाएंगे। इतना ही नहीं इसके और भी बड़े व्यापक स्तर पर विस्तार की योजना बनाई गई है .इन संस्थानों को दिल्ली पब्लिक स्कूल की तर्ज पर बनाया जाएगा।

बताया ये जा रहा है कि आने वाले समय में अकेले दिल्ली भर में ही ऐसे स्कूलों की संख्या 250 के आस पास होगी . इतना ही नहीं , इसके लिए बाकायदा इमारतो का चयन भी कर लिया गया है और इसमें पढ़ाने वालों का इन्टरव्यू भी शुरू कर दिया गया है . इसकी जानकारी दिल्ली वक्फ बोर्ड के सदस्य हिमाल अख्तर दे रहे हैं . प्रत्येक कक्षा में लगभग 45 छात्र होंगे। बोर्ड ने हलीमा सादिया को भी नियुक्त किया है.. अख्तर ने कहा कि प्रत्येक स्कूल को लगभग एक करोड़ रुपये की वार्षिक धनराशि की आवश्यकता होगी,

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