सहारनपुर से भी भयावह हालात बन रहे थे चंदौली में.. एक बार फिर योगी सरकार की बुरी फजीहत करवाने के लिए तैयार था आबकारी विभाग अगर सतर्क न होती पुलिस तो….


पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश सरकार के ऊपर जो विषय सबसे ज्यादा कलंक का बना है वो है अवैध और जहरीली शराब.. पश्चिम उत्तर प्रदेश के सबसे अंतिम जिले सहारनपुर से ले कर पूरी उत्तर प्रदेश के सीमान्त कहे जा सकने वाले कुशीनगर तक शराब के चलते हुयी मौतों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सबसे ज्यादा विपक्ष के कटघरे में खड़ा किया है. इन सभी मामलो की गूँज दिल्ली की संसद तक सुनाई दी है जो विषय की गंभीरता को प्रकट करता है .

जैसे ही कहीं अवैध या जहरीली शराब से मौते होती है वहां पर मीडिया सबसे पहले पुलिस विभाग को निशाने पर लेना शुरु कर देता है और परोक्ष रूप से उसको ही जिम्मेदार ठहराने की जुगत तलाशने लगता है.. तमाम आम लोग भी मीडिया की उन बातों को सही मान लेता हैं और घुमा फिरा कर पहला ठीकरा पुलिस विभाग के सर फोड़ दिया जाता है .. लेकिन यहाँ ये ध्यान रखने योग्य है कि अवैध शराब के लिए सबसे पहले जो विभाग जिम्मेदार होता है वो है आबकारी विभाग जो ख़ास तौर पर इसी के लिए गठित किया गया है .

बात चंदौली से शुरू करते हैं .. ये जनपद उत्तर प्रदेश का सीमान्त जिला है जहाँ से बिहार की सीमा शुरू होती है . बिहार वो प्रदेश है जहाँ नीतीश कुमार सरकार ने पूर्ण शराबबंदी कर रखी है .. ऐसे में शराब को अपनी लत बना चुके शराबियो को जो सीमा दिखाई देती है , वो है उत्तर प्रदेश की.. यहाँ पर संतोष कुमार सिंह के नेतृत्व में संख्या में सीमित पुलिस बल भले ही है लेकिन वो इतना ज्यादा सतर्क है कि कभी कोई अनहोनी नहीं हो पाई, यद्दपि नशे के सौदागरों ने अपना सारा जोर आजमा डाला है .

लेकिन यहाँ पर पुलिस बल जितना सतर्क है यहाँ का आबकारी विभाग उतना ही निष्क्रिय. पुलिस के पास हर तरह के अपराध रोकने की जिम्मेदारी है जिसे वो भले ही बाखूबी निभा रही है पर सिर्फ अवैध शराब आदि के कारोबार को रोकने के लिए बने आबकारी विभाग से एकमात्र कार्य ही नहीं सम्भल रहा है जिसे जितेन्द्र कुमार नाम के एक बेहद लापरवाह कहे जा रहे अधिकारी चला रहे हैं..  अभी हाल में चंदौली पुलिस ने क्षेत्राधिकारी त्रिपुरारी पाण्डेय के नेतृत्व में सरकारी शराब के ठेके पर एक अवैध कृत्य का पर्दाफाश किया जो किसी को भी चौंका देने के लिए काफी था .

पुलिस ने सरकारी ठेके के बगल कमरे में अवैध नकली शराब बाकायदा बनाये जाने , उस पर लेवल लगा कर तस्करी करने वाले 5 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है.. इस शराब की मात्रा इतनी थी कि सहारनपुर से भी बड़ा काण्ड होने की सम्भावना थी लेकिन आबकारी विभाग को इसकी भनक तक नहीं थी.. यकीनन अगर ये नशे का कारोबार किसी जंगल या पहाडियों आदि पर हो रहा होता तो एक बार आबकारी विभाग की नजर उस पर न जाना समझा जा सकता था .. पर जिले के सबसे सघन आबादी वाले क्षेत्र में वो भी सरकारी ठेके के बगल ऐसा कृत्य कहीं न कहीं जितेन्द्र कुमार के नेतृत्व और खुद जितेन्द्र कुमार के ऊपर सवाल खड़े कर रहा है .

दबी जुबान से लोगों का कहना है कि पुलिस को सूचना न जाए इसकी पूरी रुपरेखा कुछ भितरघाती ही तैयार किया करते थे, लेकिन पुलिस ने अपने सूत्रों और अपने खुद के नेटवर्क के माध्यम से इस पूरे विषय का भंडाफोड़ किया और न सिर्फ चंदौली जनपद के कई लोगों की जान पर आई आफत को टाला बल्कि नजदीकी बिहार में भी किसी सम्भावित अनहोनी की आशंका को निर्मूल किया..अभियुक्तों को गिरफ्तार कर के जेल भेजा गया है और ऐसे अन्य स्थानों की तलाश शुरू कर दी गई .

इस मामले में जब मीडिया को बाईट आदि देने की बारी आई तो निष्क्रिय आबकारी अधिकारी जितेन्द्र कुमार शर्मिंदा होने के बजाय सबसे आगे ऐसी शान से बैठे मिले जैसे उन्होंने चंदौली जनपद को नशामुक्त कर दिया हो .. कभी संख्या बल नहीं है , तो कभी संसाधन कम हैं का बहाना बनाने वाले आबकारी अधिकारी ये नहीं बता पा रहे हैं कि शहर की घनी आबादी में उन्हें क्या कम पड़ गया था ? अगर प्रथम दृष्टया देखा जाय तो इतने बड़े व्यापक पैमाने पर अवैध शराब बिना किसी कथित जयचंद की मिलीभगत के सम्भव ही नहीं है .

अब सवाल आबकारी अधिकारियो से जरूर बनता है कि यदि कोई बड़ी अनहोनी हो गई होती तो उसका जिम्मेदार कौन होता ? क्या ऐसे अधिकारी शराबबंदी के नियम लागू हुए प्रदेश बिहार से सटे जिले में कार्य करने योग्य कहे जा सकते हैं . किसी अनहोनी के बाद बिहार तक और उसके बाद दिल्ली हुई उत्तर प्रदेश सरकार और योगी आदित्यनाथ की फजीहत का जिम्मेदार कौन होता ? और अगर सब कुछ पुलिस विभाग को ही सम्भालना है तो आबाकरी विभाग की कम से कम चंदौली जनपद में उपयोगिता क्या है .. फिलहाल इन सवालों के जवाब उत्तर प्रदेश शासन को देने होंगे क्योकि चंदौली जनपद के आबकारी अधिकारी श्री जितेन्द्र कुमार के ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ता और शायद वो अपने रुतबे को ले कर निष्क्रिय ही नहीं बल्कि निश्चिंत भी हैं ..


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