जिसके ऊपर था नाबालिग बच्ची से बलात्कार का आरोप, अब वही लड़ रहा है लोकसभा चुनाव.. जानिये किस पार्टी का स्टार है वो

उस प्र नाबालिग बच्ची के साथ बलात्कार का आरोप है तथा वह इस मामले में उम्रकैद का सजायाफ्ता भी है.. पहले वह खुद माननीय था लेकिन अब अपने राजनैतिक रसूख के चलते, उम्रकैद का सजायाफ्ता का होने के बाद भी वह अपनी बीबी को माननीय बनाने जा रहा है. हम बात कर रहे हैं लालू यादव की पार्टी RJD के बलात्कारी विधायक राजबल्लभ यादव की.  आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव को लेकर राष्ट्रीय जनता दल ने नवादा सीट से विभा देवी को अपना प्रत्याशी बनाया है. विभा देवी नाबालिग से रेप मामले में उम्रकैद के सजायाफ्ता राजबल्लभ यादव की पत्नी हैं.

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आपको बता दें कि नवादा में पहले चरण में मतदान होना है. नवादा सीट पर 1996 से 2014 तक छह बार लोकसभा चुनाव हुए हैं. इनमें से चार बार भाजपा के उम्मीदवार ही विजयी हुए हैं. सिर्फ 1998 और 2004 में राजद के उम्मीदवार जीते हैं. वर्तमान में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह यहां से सांसद हैं. 2014 के चुनाव में गिरिराज सिंह को 44 फीसदी वोट मिले थे. जबकि, दूसरे नंबर पर रहे राजद के राजवल्लभ प्रसाद यादव को 28  फीसदी और जदयू के कौशल यादव को 19 फीसदी वोट मिले थे. इस बार यह सीट लोजपा के खाते में चली गयी है. यह पहला मौका है, जब लोजपा यहां से चुनाव लड़ने जा रही है.

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राजबल्लभ यादव ने 2016 में नाबालिग से रेप किया था, जिसमें उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है. पीड़िता बिहारशरीफ में किराये के मकान में रह कर अपनी पढ़ाई करती थी. छह फरवरी, 2016 की शाम में बर्थडे पार्टी में चलने की बात कह कर सुलेखा देवी और उसकी मां राधा देवी पीड़िता को लेकर राजबल्लभ के नवादा के पथरा इंग्लिश स्थित मकान में लेकर चली गयी. पीड़िता के अनुसार, वहां सुलेखा ने राजबल्लभ  के साथ शराब पी. पीड़िता को भी जबरन शराब पिलाने का प्रयास किया गया. इसके  बाद राजबल्लभ के बॉडीगार्ड ने पीड़िता को कमरे में धकेल दिया. वहां पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया गया. पीड़िता एवं उनके परिजनों के बयान पर इस मामले में बिहारशरीफ महिला थाने में नौ फरवरी, 2016  को प्राथमिकी दर्ज की गयी.

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सत्ताधारी पार्टी से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने छात्रा के बयान दर्ज कराये. छात्रा ने फोटो देख कर आरोपित विधायक की पहचान की. इसके बाद मामले में 20 अप्रैल, 2016 को आरोपपत्र दाखिल किया गया. अदालत ने सभी आरोपितों के विरुद्ध छह सितंबर, 2016 को आरोप गठित कर दिया. हाईकोर्ट ने 30 सितंबर को राजबल्लभ को जमानत दे दी थी. इसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की. इस पर सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने राजबल्लभ की जमानत को रद्द कर दिया. इसके बाद राजबल्लभ को दोबारा सरेंडर करना पड़ा था. प्रावधान के अनुसार उम्रकैद की सजा मिलने के बाद राजबल्लभ की विधायकी रद्द कर दी गयी.

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