बड़ी उम्मीद से आपको वोट दिया है, मोदी जी मुझे न्याय दो – अरीबा ( 3 तलाक पीडिता )

बिजनौर की अरीबा खान ने बड़े अरमानो से 11 अप्रैल 2012 में बड़े अरमानों से नहटौर के महमूद इशहाक के घर में कदम रखा . शायद तब उसके मन में केवल अपने भविष्य के सुनहरे सपने रहे होंगे. उसको पता भी नहीं होगा कि कहीं कुछ नियम क़ानून उसकी जिंदगी में ऐसा तूफ़ान लाएंगे जिसके बाद उसे प्रधानमंत्री तक से न्याय की भीख मांगनी पड़ेगी.

अरीबा का पति कोई बेरोज़गार या अनपढ़ व्यक्ति नहीं बल्कि कतर में इंजीनियर था, अरीबा की शादी के महज एक साल बाद एक फूल जैसी बेटी अलीजा पैदा हुई. बेटी को पिता की छाया मिलती रही इसलिए अरीबा ने बार बार मिन्नत की तब महमूद इशहाक उसे अपने साथ कतर ले गया . अरीबा ने बताया कि गुस्से में उसने क़तर सिर्फ उसे मारने के लिए बुलाया था और वहां उसके पति ने उसकी पिटाई कर के उसका जीवन मौत जैसा बना डाला. कुछ दिन बाद अरीबा पर अपना गुस्सा उतार कर उसे वापस बिजनौर भेज दिया.

9 अप्रैल 2015 को उसके पति ने कतर से उसे फोन पर ही 3 बार तलाक बोल दिया. अरीबा के माँ बाप महमूद से गिड़गिड़ाते रहे पर उसको कोई फर्क नहीं पड़ा और वो अपनी जिद पर अड़ा रहा. 2 साल पहले अरीबा नहटौर थाने में अपने पति की ज्यादतियों का मुकदमा लिखाने गयी थी पर मात्र एक वर्ग के लिये क़ानून को ताख पर रखने की जिद रखने वाले तत्कालीन तंत्र ने अरीबा की कोई मदद नहीं की .


अरीबा ने कहा कि अपने जीवन के सबसे विषम समय में उन्होंने टी वी पर श्री नरेन्द्र मोदी को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर बोलते और उनकी रक्षा का संकल्प लेते देखा. श्री नरेन्द्र मोदी जी कि बात अरीबा के दिल को छु गयी और उन्होंने उत्तर प्रदेश में भाजपा को वोट दे कर सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया कि मुस्लिम महिलाओं के हित में मोदी की मजबूती जरूरी है . अरीबा के पिता जावेद अली और माँ रुबीना खान खुल कर उन बेटियों के साथ आ गयी हैं जो उनकी बेटी की ही तरह ट्रिपल तलाक के दंश से अपनी जिंदगी बद से बदतर हालत में बिता रही हैं  .


अरीबा , उनके माता पिता को नरेन्द्र मोदी में पूरी आस्था व् विश्वाश है ..उनका कहना है कि उन्हें पूरा विश्वाश है कि मुस्लिम महिलाओं को इस दलदल से अगर कोई निकाल सकता है तो वो सिर्फ मोदी ही है . उन्होंने अपनी बेटी के साथ समाज में ऐसी पीड़ा झेल रही तमाम मुस्लिम बेटियों के लिए गुहार लगाई है . 


यहां एक सवाल ये है कि क्या इतना अनमोल जीवन किसी के 3 शब्दो से तबाह हो सकता है ? अपनी जिंदगी की बागडोर किसी के 3 शब्दो में देना कहाँ तक सही है ?

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