योगी प्रशासन नियमों में हुआ सख्त तो झूठे आरोपों की बौछार. फैज़ाबाद पुलिस के कर्तव्यनिष्ठ इंस्पेक्टर पर राजनीति करने चला पारस

बड़ी विडंबना का विषय है कि जब पुलिस नियमों कानूनों में ढील देने लगे तो वो आम जनता के निशाने पर रहती है लेकिन जब वही पुलिस कर्तव्यपरायणता पर उतारू हो जाय तब वो अचानक ही उनके निशाने पर आ जाती है जो दुनिया की नजर में तो जनता के प्रतिनिधि होते हैं लेकिन वो असल मे जनता नहीं रह जाते है,, भारत की चर्चित भाषा मे उन्हें नेता कहा जाता है जिन्हें खुद को चमकाने के लिए शॉर्टकट राजनीति करनी पड़ती है और उसके लिए सबसे आसान निशाना होती है पुलिस जिसके पैरों में मानवाधिकार से ले कर ना जाने कितनी बेड़ियां बंधी होती हैं और आखिर में अक्सर इसी के चलते तमाम वो अधिकारी भी सज़ा पा जाते हैं जिनका कोई कसूर नहीं होता है …

इसी क्रम में एक नया मामला आया है उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद जिले से , वो फैज़ाबाद जो अक्सर मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के दौरों के चलते हाई अलर्ट पर रहता है और पिछली सरकारों में अधिकारियों पर राजनैतिक दबाव का केंद्र बना रहता था ..यहां गोसाईगंज थाना क्षेत्र का एक BDC सदस्य पारस जो अपने क्षेत्र में एक स्थानीय नेता भी माना जाता है उसने पहले पूरे गोसाईगंज थाने को ही एक जमीन विवाद में दोषी ठहरा दिया और आरोप महिला पुलिसकर्मी तक पर जड़ दिया ..

इतना ही नहीं उसके अनुसार जब वो शिकायत ले कर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के शिकायत प्रकोष्ठ पहुँचा तो वहां इंस्पेक्टर राजीव प्रताप सिंह ने उसके साथ बुरी तरह मारपीट की ..

ये मारपीट कभी गोसाईगंज तो कभी फैज़ाबाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रकोष्ठ ने उनसे क्यों की इसका कोई ठोस कारण वो नहीं बता पाए और उनके बयानों के अनुसार केवल वो भर सही बाकी तमाम पुलिसकर्मी गलत थे जो बेहद हैरान कर देने वाला रहा …

इस प्रकरण में जब इंस्पेक्टर राजीव प्रताप सिंह से बात की गई तो उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को आधारहीन व मिथ्या बताया व स्वयं को ऐसे आरोपों से हतप्रभ व ठगा सा बताया ..

यद्द्पि इंस्पेक्टर श्री राजीव प्रताप सिंह पर उस SSP कार्यालय में पारस को पीटने का आरोप लग रहा जो अक्सर CCTV आदि की नजर में रहता है, साथ ही इंस्पेक्टर राजीव प्रताप सिंह से आरोप लगाने वाले पारस की पहले की कोई दुश्मनी तो दूर जान पहिचान भी नहीं थी , तो एक अधिकारी ऐसा क्यों करेगा ये एक बार सोचने का विषय जरूर है … साथ ही पारस के अनुसार उनसे पहले गोसाईगंज थाने की पुलिस ने मारपीट की , फिर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिकायत प्रकोष्ठ में पुलिस ने मारपीट की , तो आखिर वो वजह क्या है कि उन्हें पूरे जिले की पुलिस अपनी दुश्मन दिख रही ??? आरोप लगा रहे पारस आगे इस मामले की जांच करने वाले अधिकारी से संतुष्ट होंगे या नहीं ये भी भरोसा नहीं है …

फिलहाल मामला जांच के अधीन है फिर भी पुलिसकर्मियों पर ऐसे आरोप यकीनन अपराध, आतंक से लड़ रहे पुलिस दल के मनोबल को चोट पहुँचाते हैं जिस पर जनमानस व शासन को ध्यान देने की जरूरत है …

Share This Post