बहुत बड़ा बदलाव हो सकता है उत्तर प्रदेश पुलिस के ढांचे में. अपराध रोकने पर आमादा योगी आदित्यनाथ….


उत्तर प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को संभालने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने पुलिस में कमिश्नर सिस्टम लागू कर सकती है। वहीं, पिछले दिनों में देखा गया है कि उत्तर प्रदेश कानून-व्यवस्था संभालने में पुलिस और जिला-प्रशासन के बीच बिगड़ते रिश्ते को देख योगी आदित्यनाथ बड़ा फैसला ले सकते हैं। आदित्यनाथ ने कानून-व्यवस्था और अपराध पर नियंत्रण कर उत्तर प्रदेश की जनता को एक सुरक्षित माहौल देने का वादा कर सरकार बनाने में कामयाब हुई है, इसीलिए योगी आदित्यनाथ बीजेपी को आगामी लोकसभा चुनाव में बैकफुट पर नहीं देखना चाहते। 
इसीलिए बीजेपी सरकार शासित उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लगातार हो रहे अपराधिक घटनाओं पर काबू पाने के लिए यूपी पुलिस को और भी मजबूत बनाने के लिए अलग-अलग तरीका अपना रही हैं। इसके तहत यूपी के बिगड़ते कानून-व्यवस्था को संभालने के लिए योगी सरकार दुवारा पुलिस में कमिश्नर सिस्टम लागू कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, पता चलता है की योगी आदित्यनाथ के सामने 100 दिन की कार्ययोजना में प्रस्तुत करने के दौरान पुलिस की तरफ से रखें गए प्रस्तावों में कमिश्नर सिस्टम लागू कराना भी शामिल था। 
जिसमे बिगड़ते कानून व्यवस्था को लाइन पर लाने के लिए पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह सहित कई बड़े अफसर भी यूपी पुलिस में कमिश्नर सिस्टम लागू करने को सही बता चुके हैं। इसके पीछे तर्क यह बताया गया कि उत्तर प्रदेश में होने वाली कई बड़ी घटनाओं में अक्सर पुलिस और जिला प्रशासन के बीच ठीक तालमेल देखने को नहीं मिले है। जिसमें सूत्रों से यह भी पता चला कि जवाहरबाग कांड, मुजफ्फनगर सहित सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा से संबंधित रिपोर्ट में पाया गया कि जिला प्रशासन और पुलिस के बीच तालमेल ठीक नहीं थे।
अगर कमिश्नर सिस्टम लागू हो जाता है, तो पुलिस को जिला प्रशासन से संबंधित मामले में एक्शन लेने के लिए प्रशासन के आदेश की बाध्यता से मुक्त हो जाएगी। वहीं, शुरु हो चुकी है कमिश्नर सिस्टम से जुड़ी टेस्टिंग। हालांकि, अभी तक इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और इसके टेस्ट में जोन में एडीजी और जोन में आईजी के अधिकारियों की तैनाती की गई है। वहीं, पूर्व यूपी डीजीपी रिजवान अहमद के कार्यकाल में कमिश्नर सिस्टम लागू करने को लेकर काफी गंभीरता से मांग उठी थी और अखिलेश यादव की योजना पर योगी आदित्यनाथ की नज़र। 
इसलिए पिछले साल पुलिस वीक पर अहमद ने तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव के सामने कमिश्नर सिस्टम लागू करने की बात रखी थी। इसके बाद अखिलेश यादव ने तत्कालीन मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी का गठित किया था। लेकिन इस कमेटी के लिए इस नए सिस्टम को लेकर आज तक एक भी बैठक नहीं हो सकी। योगी सरकार को आते ही पुलिस में कमिश्नर सिस्टम पर काफी गंभीरता से विचार हो रहा है। बता दें कि दिल्ली, मुंबई औऱ बंगलुरु, पंजाब, राजस्थान जैसे राज्यों में कमिश्नर सिस्टम पहले से ही लागू है। जहां यह काफी अच्छे से काम कर रहा है।
जानें क्या है पुलिस कमिश्नर सिस्टम-
1. सबसे महत्वपूर्ण बात कि पुलिस कमिश्नर सिस्टम अंग्रेजों के शासन के समय की व्यवस्था है। 2. कमिश्नर की नियुक्ति 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में होती है। वहीं यूपी की आबादी करीब 20 करोड़ से भी ज्यादा है। 3. जिन शहरों की आबादी 10 लाख से ज्यादा है वहां कमिश्नीर की नियुक्ति की जाती है। 4. पुलिस के पास सीआरपीसी के तहत कई महत्वपूर्ण अधिकार आ जाते हैं, इनमें भीड़ पर लाठीचार्ज, फायरिंग, धारा 144 शामिल हैं। 5. पुलिस को होटल, रेस्तरां सहित आर्म्स लाइसेंस जारी करने का अधिकारी मिल जाता है। 6. मजिस्ट्रियल सिस्टम में धारा 144, 07 और 51 की पावर डिप्टी कमिश्नर को होती है। 7. आरोपी पर ज़ुर्माना लगाकर जेल भेजने, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, नारकोटिक्स, एक्साइज़ से जुड़ी पावर भी पुलिस कमिश्नर को इस सिस्टम में मिल जाती है।

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