लखनऊ सहित तीन हज हाउस पर योगी सरकार का ऐसा फैसला जिस पर कट्टरपंथी समझ नहीं पा रहे कि विरोध करें भी तो कैसे ?


उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने लखनऊ के हज हाउस सहित तीन जिलों के हज हाउस को लेकर ऐसा फैसला लिया है, जो कट्टरपंथियों को गर्म दूध की तरह न तो निगलते ही बन पा रहा है और न ही उगलते बन रहा है. कट्टरपंथी तीन जिलों के हज हाउस को लेकर लिए गये योगी सरकार के इस फैसले का विरोध करना तो चाह रहे हैं लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि वो इसका विरोध करें भी तो कैसे करें?

दरअसल योगी सरकार उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत 3 जिलों के हज हाउस के नाम बदलने की तैयारी में है. इसको लेकर सरकार ने प्रस्ताव भी भेज दिया है. इस प्रस्ताव के मुताबिक़, लखनऊ के मौलाना अली मियां हज हाउस का नाम बदलकर पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा जाएगा. इसके अलावा वाराणसी के हज हाउस का नाम भी शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खां और गाजियाबाद के हज हाउस का नाम देश के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद के नाम पर होगा. इस बारे में हज कमेटी ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है.

अल्पसंख्यक कल्याण एवं हज राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि हज हाउस का नामकरण महापुरुषों के नाम पर किया जाना चाहिए. इन महापुरुषों से आम लोगों और युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है. उनके जैसा कुछ कर गुजरने का जज्बा भी पैदा होता है. उन्होंने आगे कहा कि जहां लखनऊ के हज हाउस का नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार हो गया है, वहीं वाराणसी और गाजियाबाद के हज हाउस नए बने हैं. उनका नाम भी मशहूर हस्तियों के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया है. आपको बता दें कि हज समिति का यह प्रस्ताव कैबिनेट में जाएगा. इस पर अंतिम मुहर कैबिनेट ही लगाएगी.


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