आगरा पुलिस के घायलों के साथ होगा न्याय या उन्हें भी बना दिया जाएगा इलाहाबाद का सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र ?

मानवाधिकार , मैनुअल आदि तमाम बेड़ियों से जकड़े पुलिस के कर्तव्यनिष्ठ वर्दीवालों के लिए वो समय बेहद विकट और कभी कभी किंकर्तव्यविमूढ़ कर देने वाला होता है जब उनके सामने से पत्थर बरस रहे होते हैं या उन पर जान का खतरा मंडरा रहा होता है . उनके पास हथियार होते हैं जिनका वो यथासम्भव कम से कम इस्तेमाल करते हैं यहाँ तक कि कई बार तो इसी चक्कर में उन्हें अपने प्राण गंवाने पड़ जाते हैं . हैरानी की बात ये होती है कि सब इंस्पेक्टर सहजोर सिंह या जे पी सिंह जी की तरह उनके बलिदान पर किसी प्रकार का कोई शोर शराबा नहीं होता लेकिन जब पुलिस वाला आत्मरक्षा में ही कोई फायर कर दे तो उसके ऊपर पूरा समाज , अधिकारी , मानवाधिकार आदि एक साथ टूट पड़ते हैं और उसकी जिन्दगी हो जाती है नर्क से भी बदतर जैसे तीन साल से जेल काट रहे इलाहाबाद के सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह जिनकी आत्मरक्षा ही बना दी गयी उनका अपराध.. एक बार फिर से कुछ ऐसा ही मामला आ रहा है सामने . 

ज्ञात हो कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे धौलपुर जिले में उत्तर प्रदेश पुलिस को एक बड़ी चुनौती पशु तस्करों की पेश आती थी . इस अपराध के चलते अक्सर पुलिस वालों को मीडिया और समाज के गुस्से का शिकार बनना पड़ता था . इस पर नकेल कसने के लिए जब पुलिस ने कमर कस ली तो उनको जबर्दस्त प्रतिरोध का सामना करना पड़ा . मामला है धौलपुर का जहाँ तमाम समाचार माध्यमों में बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश पुलिस और तस्करों के बीच की गोलीबारी में एक व्यक्ति मारा गया है और दूसरा से घायल हुआ है . यह मुठभेड़  भैंस चोरों को पकड़ने पहुंची यूपी पुलिस को तब झेलनी पड़ी जब प्रतिउत्तर में भारी भीड़ ने पुलिस टीम पर भारी पथराव किया ..पशु चोरी का पीड़ित जिसने मुकदमा पंजीकृत करवाया उसके अनुसार 18 पशु चोरी कर के गये थे जिन पर कार्यवाही करना पुलिस का कर्तव्य था . 

जवाबी कार्यवाही से पहले पुलिस चेतावनी देती रही पर उधर से भीड़ एक नहीं मानी . हालात ये बने कि भारी पथराव से उत्तर प्रदेश पुलिस का के सब इंस्पेक्टर और एक कांस्टेबल बुरी तरह से घायल हो गया . यह घटना क्षेत्र सरमथुरा थाना क्षेत्र के गांव सायपुर का है जहाँ सटीक सूचना थी कि चोरी का पशु रखा गया है .  पुलिस का सारा कार्य संवैधानिक व कानूनी तौर से ही चल रहा था कि अचानक ही भीड़ में मौजूद असामाजिक तत्वों ने फायरिंग करना शुरू कर दिया  पुलिस ने काफी चेतावनी भी दी लेकिन असमाजिक तत्व ज़रा सा भी सुनने और समझने को तैयार नहीं थे . यह घटना देर रात एक बजे के बाद की है जिस से पत्थरबाज अँधेरे का लाभ उठा कर छिप कर पत्थरबाजी कर रहे थे जो पुलिस के लिए आत्मरक्षा में भी बड़ी बाधा साबित हो रही थी . इस भारी पथराव में खुद थानेदार विवेक शर्मा बुरी तरह से घायल हो गये जो अब तक इलाज करवा रहे हैं . एक अन्य कांस्टेबल भी हमले की चपेट में आ गया जो बुरी तरह से घायल है .  

इस गाँव में पशु चोरी की इतनी गंभीर शिकायतें पुलिस के पास थी कि यहाँ पर एहतियात बरतते हुए आगरा जिले की बसईजांगर थाने की पुलिस दो गाड़ियां के साथ सायपुर गांव पहुंची. पुलिस ने घरों के आस पास संदिग्धों की तलाश शुरू की और वहां के कुछ अन्य लोगों से इस विषय पर सहयोग मांगते हुए सवाल आदि पूछने शुरू किये .अचानक ही अपने आप को घिरता देख कर वहां मौजूद कुछ असामाजिक तत्वों ने पूरी संवैधानिक प्रक्रिया को असंवैधानिक बना डाला और उन्होंने पुलिस वालो को निशाना बना कर पथराव शुरू कर दिया .पुलिस के जवानो ने हर प्रकार से समझाया लेकिन भीड़ की आड़ में छिपे पशु तस्कर अपनी पत्थरबाजी से बाज़ नहीं आये क्योंकि पुलिस के अभियान की सफलता उनके गुनाहों का भंडाफोड़ और उनके जेल जाने की शत प्रतिशत गारंटी थी जिसे वो किसी भी हाल में सफल नहीं होने देना चाह रहे थे . इस मामले में आगरा पुलिस की भी संवेदना गाँव के उस शोकाकुल परिवार के साथ है जिसको गोली लगना बताया जा रहा है .. 

बताया जा रहा है कि इस गोलीबारी में भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति की मृत्यु हो गयी है और दूसरा घायल हो गया है जबकि भारी पथराव झेल कर जैसे तैसे अपनी जान बचा पाए पुलिस बल में एक कांस्टेबल और एक इंस्पेक्टर जिला अस्पताल में भर्ती है जिनका इलाज़ चल रहा है . अफ़सोस की बात ये है कि जिन्दगी और मौत से जूझ रहे घायल पुलिस वालों की अब तक किसी ने भी किसी प्रकार की सुध लेनाउचित नहीं समझा और कुछ ने एकतरफा जहर पुलिस बल के खिलाफ उगलना शुरू कर दिया . .इसमें वो भी तथाकथित पत्रकार शामिल हैं जो घटनास्थल पर जाना तो दूर जानते भी नहीं हैं . इस पूरी घटना में कहीं भी एक बार भी नहीं बताया गया है कि पुलिस की एक महिला कांस्टेबल को भी बुरी तरह से चोटें आई हैं जो घायलअवस्था में इलाज करवा रही है . इस मामले में पुरुष पुलिसकर्मियों पर महिलाओं से बदसलूकी का आरोप लगाया जा रहा है लेकिन इस घटना में घायल महिला पुलिसकर्मी होना इस दावे पर कहीं न कहीं सवाल खड़े कर रहा है . 

शामली में अंकित तोमर के बलिदान के बाद भी पुलिस बल ने अपने मनोबल पर ज़रा सा भी असर नहीं पड़ने दिया और वो अपराधियों से जंग लडती रही इसलिए जरूरी है इस घटना पर बिना किसी पूर्वाग्रह से ग्रसित हुए निष्पक्षता से विचार करने और जांच अधिकारीयों को जांच करने की बेहद आवश्यकता है . उन हालात आदि का भी पूरा खुलासा हो जब सैकड़ों लोगों से घिरे कुछ गिने चुने पुलिस वालों ने अपनी जान कैसे बचाई होगी . इस घटना में मृतक पथराव में शामिल था या नहीं , वो पुलिस की ही गोली से मृत हुआ या पथराव आदि में शामिल किसी पशु तस्कर के हमले का शिकार हो गया इस मुद्दे पर भी सघन जांच आवश्यक है. इस पूरी जांच के पूरे होने तक यकीनन सबको सहयोगात्मक रवैया रखना चाहिए क्योकि लाशों पर राजनीति करने वाले कुछ तथाकथित राजनेता जरूर इस मौके को भुनाने की हर सम्भव कोशिश में होंगे वैसे भी पुलिस और पत्थरबाजों के इस संघर्ष का लाभ पहले भी वो पशु तस्कर उठा कर भाग चुके हैं जिनकी जगह अब तक यकीनन जेल होनी चाहिए थी . 

Share This Post

Leave a Reply