ओलंपिक में जाने से पहले तबाह हो चुकी थी उसकी जिन्दगी.. जानिये एक ऐसा संघर्ष जो हिला देगा आपको


सभी ने उनका कैरियर ख़त्म मान लिया था. इस दौरान उनका प्रदर्शन तो ख़राब हो ही रहा था, साथ ही उनके चरित्र पर भी सवाल खड़े हुए थे. लेकिन उन्हें विश्वास था अपनी मेहनत पर तथा उनका संकल्प था अपने सपनों को को पूरा करने का. वह लड़े, जमकर लड़े तथा आज भारत उन पर गर्व कर रहा है. हम बात कर रहे हैं भारतीय शूटर संजीव राजपूत की, जिन्होंने भारत को टोक्यो ओलम्पिक 2020 के लिए ओलम्पिक कोटा दिलवाया है. ये चौथी बार है जब संजीव राजपूत ने भारत को ओलम्पिक कोटा दिलवाया है.

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जीवन के उतार-चढ़ाव क्या होते हैं. यह चार बार के एशियाई खेलों के मेडलिस्ट हरियाणा के शूटर संजीव राजपूत से अच्छी तरह कोई नहीं जान सकता है. संजीव राजपूत का जीवन संघर्षों की वो गाथा है जो आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणा हो सकता है. भारतीय टीम के सबसे अनुभवी शूटर संजीव् राजपूत ने रजत पदक के साथ देश को रियो डि जेनेरियो विश्व कप में चौथी बार ओलंपिक का कोटा दिलाया है. 2016 में रियो ओलंपिक के लिए कोटा हासिल करने के बावजूद एनआरएआई ने उनका रियो का टिकट ट्रैप शूटर काइनन चेन्नई को दे दिया था.

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उसके बाद संजीव राजपूत की स्थिति ये हो गई थी कि उन पर दुष्कर्म के आरोप लगे. उनकी नौकरी चली गई. इसके बाद लोगों ने संजीव पर सवाल खड़े कर दिए. उन्हें चुका हुआ मान लिया गया. उनकी जमकर आलोचना हुई लेकिन संजीव चुप रहे तथा अपने जुबान नहीं बल्कि अपने प्रदर्शन से इसका जवाब देना का फैसला किया. संजीव आज भी दुष्कर्म के आरोपों पर अदालती लड़ाई लड़ रहे हैं. इस लड़ाई के बीच ही 38 साल के इस शूटर ने राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण और एशियाई खेलों का रजत जीता.

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इसके बाद भी उनके राज्य ने उन्हें इन पदकों का कोई कैश अवार्ड नहीं दिया. बृहस्पतिवार को भी संजीव की किस्मत उस समय उनसे हंसी-ठिठोली कर रही थी, जब उन्होंने विश्वकप में रजत जीतकर ओलम्पिक कोटा हासिल किया था. 50 मीटर थ्री पोजीशन के फाइनल में 39वें निशाने पर उनका स्कोर शून्य दिखाया गया. इसका मतलब यह था कि वह पदक और कोटा की दौड़ से बाहर होने वाले हैं, लेकिन इस शूटर ने प्रोटेस्ट दाखिल किया. हैरानी जनक तरीके से संजीव सही थे. निशाना 10 पर लगा था, बावजूद इसके संजीव स्वर्ण नहीं जीत पाए. 1.1 की बढ़त के बावजूद उन्होंने अपना अंतिम निशाना 8.8 का किया और .2 अंक से उनके हाथ से स्वर्ण फिसल गया.

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इसके बाद संजीव ने खुलासा किया कि निशाने पर हाईब्रिड लेजर पर लगाए जाने थे. इसमें गलती की गुंजाइश बहुत कम होती है. इस लिए शूटिंग में प्रोटेस्ट स्वीकार नहीं किए जाते हैं, लेकिन यहां चेकिंग में उनका निशाना 10 पर निकला. क्वालिफाइंग राउंड में भी उनकी बंदूक में खराबी आ गई थी. संजीव का दावा है कि उनका स्कोर 1181 होना चाहिए था, लेकिन दिया 1180 गया. दो बार के ओलंपियन और चौथा विश्व कप पदक जीतने वाले संजीव बेहद भावुक होकर कहते हैं कि उनके पास शूटिंग में अच्छा प्रदर्शन कर जवाब देने के अलावा कोई चारा नहीं है.

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उन्होंने कहा कि पिछली बार का अन्याय नहीं दोहराया जाए, इसके लिए वह भगवान से यही प्रार्थना करते हैं कि 10 मीटर एयरराइफल के पुरुषों और ट्रैप शूटरों को ओलंपिक कोटा मिल जाए जिससे 50 मीटर थ्री पोजीशन में टोक्यो ओलंपिक के लिए उनका रास्ता साफ हो जाए. बता दें कि पिछली बार भी उन्होंने ओलम्पिक कोटा हासिल किया था लेकिन अंत में उनका टिकट काट दिया गया था. संजीव अपने प्रदर्शन के दम पर टारगेट ओलंपिक पोडियम (टॉप्स) में शामिल हैं। यहीं से उन्हें ट्रेनिंग का सहारा मिल रहा है, लेकिन कमाई के नाम पर वह कुछ नहीं कर रहे हैं. संजीव कहते हैं कि अब तो उन्होंने कोचिंग देना भी बंद कर दिया है. आरोपों के बाद उन्होंने कोचिंग से तौबा कर ली है।

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