धोनी के कारण 2011 वर्ल्डकप में शतक पूरा नहीं कर पाए थे गौतम गंभीर.. गौतम के गंभीर बयान से क्रिकेट जगत में हलचल


2011 क्रिकेट विश्व कप फाइनल.. मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम.. कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने जैसे ही श्रीलंका के नुवान कुलशेखरा की गेंद पर छक्का लगाया था, ऐसा लगा जैसे हिंदुस्तान में अप्रैल महीने में दिवाली आ गई हो. इस छक्के के साथ ही भारत दूसरी बार एकदिवसीय क्रिकेट विश्वकप जीत चुका था. इस जीत की खुशी में सिर्फ मुंबई का वानखेड़े स्टेडियम या फिर मुंबई नगरी ही नहीं बल्कि पूरा हिंदुस्तान जश्न मना रहा था, पटाखे फोड़े जा रहे थे. 91 रन की पारी खेलने वाले कप्तान धोनी मैन ऑफ़ द मैच बने थे.

देश के ये एक गौरवपूर्ण पल तो था ही लेकिन कप्तान एमएस धोनी तथा ओपनर बल्लेबाज गौतम गंभीर के लिए भी ये एक शानदार पल था. धौनी ने 2007 में टी20 विश्व कप खिताब जीता था और उसके बाद इस सफलता की वजह से वो भारत के सबसे सफलतम कप्तान भी बने. कप्तान एमएस धौनी के नेतृत्व में टीम इंडिया की इस दोनों जीत में जो एक बात कॉमन थी वो ये कि दोनों ही बार फाइनल मुकाबले में टीम इंडिया के ओपनर बल्लेबाज गौतम गंभीर टीम इंडिया की तरफ से सर्वश्रेष्ठ स्कोरर थे लेकिन किस्मत देखिये कि दोनों ही र गंभीर मैन ऑफ़ द मैच नहीं बन पाए.

गौतम गंभीर ने टी 20 विश्व कप फाइनल 2007 में 75 रन की पारी खेली थी, लेकिन मैन ऑफ द मैच बने थे इरफान पठान जिन्होंने 16 रन देकर तीन विकेट लिए थे. 2011 वनडे विश्व कप फाइनल में गंभीर ने 97 रन की पारी खेली थी, लेकिन मैन ऑफ द मैच धौनी को चुना गया जिन्होंने नाबाद 91 रन की पारी खेली थी. सचिन तथा सहवाग के सस्ते में आउट हो जाने के बाद गंभीर ने टीम इंडिया को जीत दिलाने का जिम्मा उठाया तथा इसको बखूबी निभाया भी. फाइनल में गंभीर का जज्बा पूरे देश ने देखा था कि किस तरह पसीने से पानी पानी हो जाने के बाद भी गंभीर एक छोर पर डटा रहा तथा टीम को मंजिल तक पहुंचाया. लेकिन जब वह शतक से महज 3 रन दूर थे तभी वह आउट हो गये.

अगर गंभीर 3 रन और बना लेते तो शायद ये उनके करियर की सर्वश्रेष्ठ पारी कही जाती. वैसे भी गंभीर की ये पारी कभी न भुलाने वाली पारी है लेकिन धोनी के 91 गंभीर के 97 रन को छिपा देते हैं. हर किसी को ये मलाल आज तक है कि काश गौतम अपना शतक पूरा कर पाते. काश गौतम 3 रन और बना पाते. खैर भले ही गौतम अपना शतक न बना पाए हों लेकिन उनकी ये पारी भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में अनंत काल अविस्मरनीय रहेगी.

लेकिन गंभीर शतक पूरा क्यों नहीं कर पाए? जब वह शतक से महज 3 रन दूर थे तब वह आराम के खेलकर शतक पूरा करने के बजाय आक्रामक शॉट लगाने के प्रयास में आउट क्यों हो गये ? इसका जवाब खुद गंभीर ने दिया है. गंभीर ने बताया है कि वह विश्व कप फाइनल में किस तरह से धौनी की सलाह की वजह से वो अपना शतक पूरा नहीं कर पाए थे. गंभीर ने बताया कि मैं पहले भी कह चुका हूं कि जब में फाइनल में 97 के स्कोर पर पहुंच चुका था तब मैं अपने व्यक्तिगत स्कोर के बारे में नहीं सोच रहा था. मेरा ध्यान पूरी तरह से उस टारगेट पर था जो श्रीलंका ने हमें दिया था. मुझे याद है कि जब ओवर खत्म हुआ तब मैं और धौनी क्रीज पर थे.

उन्होंने मुझसे कहा कि सिर्फ तीन रन बचे हैं और तुम ये तीन रन पूरे कर लो और तुम्हारा शतक पूरा हो जाएगा. गंभीर ने कहा कि अगर धौनी मुझे मेरे स्कोर के बारे में याद नहीं दिलाते तो मैं आसानी से तीन रन पूरे कर लेता. उनके द्वारा ये बात याद दिलाने के बाद मैं तीन रन को लेकर कुछ ज्यादा ही सावधान हो गया और थिसारा परेरा की गेंद पर एक खराब शॉट खेलकर आउट हो गया. गंभीर का कहना है कि धौनी की उस सलाह की वजह से मेरा ध्यान भंग हो गया और मैंने अपना विकेट गंवा दिया. वहीं गंभीर के आउट होने के बाद धौनी लगातार बल्लेबाजी करते रहे और छक्का लगाकर टीम को जीत दिला दी.

गंभीर ने कहा कि जब तक में 97 रन पर था मैं वर्तमान में था, लेकिन जैसे ही मैंने सोचा कि मैं सौ रन पूरे करने से तीन रन दूर हूं तब मैं उसे पाने की इच्छा में कहीं और चला गया और अपना विकेट गंवा बैठा. गौतम ने कहा कि इसलिए जरूरी है कि आप वर्तमान में ही रहो. जब मैं आउट होने के बाद ड्रेसिंग रूम में गया मैंने खुद से कहा कि ये तीन रन मुझे पूरे जीवन परेशान करेंगे और ये सच है. आज भी मुझसे लोग पूछते हैं कि आप अपने तीन रन क्यों नहीं पूरे कर पाए.


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share