10 मई – वो पावन दिन जब मेरठ से शुरू हुआ था 1857 का स्वतंत्रता संग्राम ..खुद अंग्रेजों ने लिखा है कि – “क्रांति के मुखिया बहादुरशाह जफर की जगह तात्या टोपे होते तो हम हार जाते”

देश के अंदर रह कर आज़ादी के नारे लगाने वाले ये वही गद्दार हैं जिनके पुरखों ने तब गद्दारी की

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27 अप्रैल – वो दिन जब मणिपुर में अनगिनत बलिदान देने के बाद भी हमारे हाथ से निकल गया था “कांगला का किला”. जंग थी 1857 की

इस इतिहास को बताते तो शायद उनके तथाकथित आका नाराज होते . यद्दपि कलम भी हिलने लगती क्योकि उन्हें सच

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16 अप्रैल: बलिदान दिवस पर नमन है 1857 की क्रांति के महानायक विश्वनाथ शाहदेव जी को.. वो योद्धा जो रियासत का राज छोड़ युद्ध किये और प्राप्त की अमरता

ये झोलाछाप इतिहासकारों का पाप ही कहा जाएगा जिन्होंने हमे जानने ही नहीं दिया कि हमारे लिए किस ने त्याग

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