सामने से था माँ दुर्गा मंदिर.. अंदर बन चुका था चर्च.. वहां पुजारी नहीं बल्कि पादरी आते थे

वो बाहर से तो मंदिर था.. दुर्गा माता का मंदिर.. लेकिन वह अंदर ही अंदर चर्च बन चुका था. सबको

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