उसने अपनी देहदान की गरीबों और जरुरतमंदों के लिए…अचानक ही आ गया फतवा क्योंकि बताया गया उसकी देह उसकी नहीं है

शरीर दान को मजहब के खिलाफ बताना व्यक्ति मानसिक संकीर्णता को दर्शाता है…

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