5 अगस्त – गोलियों से छलनी शुभेंदु बस चलते रहे और रॉकी नोमान पर गोलियां बरसाते रहे . उसे पकडवाया जिसने कहा था – “उसे मज़ा आता है हिन्दू के कत्ल में”

भारत के इन दोनों रत्नों को भूल गए हम क्योंकि प्रचार तो सलीम का हुआ .

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23 दिसम्बर- बलिदान दिवस धर्म संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद जी जिनके हत्यारे अब्दुल रशीद को आज़ादी के नकली ठेकेदारों ने दिया था प्रोत्साहन

स्वामी जी के शुद्धि आन्दोलन को बना दिया गया था विवाद का विषय जबकि मोपला और नोवाखाली नरसंहार पर छाई रही ख़ामोशी

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सामने आए राजस्थान पुलिस के बलिदानी लालाराम के हत्यारों के नाम .. अब कोई है , जो मांगेगा इस वीर के लिए भी इंसाफ़

इस वीर के बलिदान के बाद इतनी खामोशी क्यों ?

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