इतना बदलाव कि शिवपाल यादव भी योगी की तारीफ कर के धर्मग्रन्थ “गीता” पढने की सलाह दे रहे .

कभी भगवा को साम्प्रदयिक बताने वाले शिवपाल यादव को अचानक ही भगवा और उसकी मूल में मौजूद गीता से अचानक ही इतना लगाव कैसे हो गया ?

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