31 मार्च- 2011 में आज ही गिनी गई थी भारत की आबादी.. उस समय ये थी 121 करोड़ जो आज भी बढ़ रही बेतहाशा.. “ख़ास कर एक वर्ग की”

बिना खाने की चिंता व बिना सोने की फिक्र किये हुए, देश की उन्नति व जनसँख्या के संतुलन को बनाये

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लोकसभा में फिर उठी मांग.. तत्काल बने जनसंख्या नियन्त्रण कानून और उल्लंघन करने वालों की छीनी जाएँ सभी सुविधाएँ

बिना खाने की चिंता व बिना सोने की फिक्र किये हुए, देश की उन्नति व जनसँख्या के संतुलन को बनाये

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