प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 27 फरवरी को उत्तराखंड की शीतकालीन यात्रा का उद्घाटन करेंगे, जो एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है। यह यात्रा उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय क्षेत्र के चार प्रमुख धामों में से एक गंगोत्री धाम से जुड़ी हुई है। इस अवसर पर, गंगोत्री मंदिर के पास स्थित मुखबा गांव को शीतकालीन प्रवास स्थल के रूप में स्थापित किया जाएगा। यह आयोजन न केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देने में मदद करेगा।
बता दें कि मुखबा गांव को मां गंगा का शीतकालीन निवास स्थल माना जाता है, और यहां हर साल सर्दियों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। यह गांव एक अद्भुत परंपरा का हिस्सा है, जो भारतीय संस्कृति और विश्वासों की गहरी जड़ें दर्शाती है। यहां की धार्मिक अनुष्ठान विधियां और पूजा पद्धतियां विशेष रूप से शीतकालीन समय में आयोजित होती हैं, जब गंगोत्री मंदिर तक पहुंचना कठिन हो जाता है।
मुखबा गांव का यह शीतकालीन प्रवास स्थल धार्मिक महत्व के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर को भी संरक्षित करने का कार्य करेगा। जब गंगोत्री मंदिर बंद होता है, तब यहां से मां गंगा की पूजा विधि को मुखबा गांव में स्थानांतरित किया जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और गंगोत्री धाम की मान्यता से जुड़ी हुई है।
पीएम मोदी के उद्घाटन के बाद, यह यात्रा उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में पर्यटन को प्रोत्साहित करने का भी काम करेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा, क्योंकि शीतकालीन प्रवास स्थल के रूप में मुखबा गांव को चुनने से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि की संभावना है।
उत्तराखंड सरकार का यह कदम स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने और शीतकालीन पर्यटन को आकर्षित करने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, यह धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी एक नई दिशा तय करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस शीतकालीन यात्रा का उद्घाटन उत्तराखंड के विकास और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।